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    तेलंगाना इंटरमीडिएट सप्लीमेंट्री रिजल्ट 2026 आज होगा घोषित

    तेलंगाना बोर्ड आज इंटरमीडिएट सप्लीमेंट्री परीक्षा का परिणाम घोषित करेगा। छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं। जानिए डाउनलोड की पूरी प्रक्रिया।

    तेलंगाना इंटरमीडिएट सप्लीमेंट्री रिजल्ट

    तेलंगाना राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के छात्रों के लिए आज का दिन बहुत बड़ा है। बोर्ड आज प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाओं का तेलंगाना इंटरमीडिएट सप्लीमेंट्री रिजल्ट घोषित करने जा रही है। परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों छात्र सुबह से ही अपने नतीजों की राह देख रहे हैं।

    बोर्ड अधिकारियों ने परिणाम जारी करने की सभी तैयारी पूरी कर ली है। छात्र अपने रोल नंबर की मदद से कंप्यूटर या मोबाइल पर तुरंत अपना नंबर देख पाएंगे। इस बार परीक्षा का आयोजन काफी कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच किया गया था।

    छात्रों का इंतजार आज खत्म होगा

    इस परीक्षा में राज्य भर से बहुत से छात्र शामिल हुए थे। मुख्य परीक्षा में जो छात्र एक या दो विषयों में सफल नहीं हो पाए थे, उन्हें इस परीक्षा के जरिए अपनी पढ़ाई बचाने का एक और मौका मिला था। छात्रों को उम्मीद है कि इस बार उनका प्रदर्शन पहले से बेहतर रहेगा।

    शिक्षक और माता-पिता भी बच्चों के अच्छे अंकों की कामना कर रहे हैं। परिणाम जारी होने के बाद छात्र आगे की कक्षाओं में दाखिला ले सकेंगे। इससे उनका पूरा एक साल खराब होने से बच जाएगा।

    आधिकारिक वेबसाइट पर देखें नतीजे

    बोर्ड ने साफ किया है कि नतीजे केवल ऑनलाइन माध्यम से ही देखे जा सकते हैं। छात्र इंटरनेट की मदद से बोर्ड की मुख्य वेबसाइट पर जाकर अपना अंक पत्र देख सकते हैं। किसी भी छात्र को डाक द्वारा घर पर परिणाम नहीं भेजा जाएगा।

    भारी संख्या में छात्रों के लॉगइन करने से वेबसाइट कभी-कभी धीमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में छात्रों को बिल्कुल भी परेशान नहीं होना चाहिए। कुछ समय रुक कर दोबारा प्रयास करने से परिणाम आसानी से खुल जाएगा।

    तेलंगाना इंटरमीडिएट सप्लीमेंट्री रिजल्ट घोषित

    जैसे ही बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी बटन दबाकर परिणाम को लाइव करेंगे, वैसे ही लिंक सक्रिय हो जाएगा। छात्र अपने पास अपना एडमिट कार्ड या प्रवेश पत्र जरूर रखें। उसमें दिया गया हॉल टिकट नंबर ही आपका असली रोल नंबर है।

    नतीजे देखने के लिए आपको केवल अपना हॉल टिकट नंबर वेबसाइट पर दर्ज करना होगा। इसके बाद आपकी स्क्रीन पर आपके सभी विषयों के नंबर दिखाई देने लगेंगे। सुरक्षा के लिहाज से अपने विवरण को किसी अजनबी से साझा न करें।

    ऐसे डाउनलोड करें अपना स्कोरकार्ड

    सबसे पहले अपने मोबाइल के इंटरनेट ब्राउज़र को खोलें और बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां होम पेज पर आपको सप्लीमेंट्री परीक्षा परिणाम का एक चमकता हुआ लिंक दिखाई देगा। उस लिंक पर क्लिक करते ही एक नया पेज खुल जाएगा।

    नए पेज पर दिए गए खाली बॉक्स में अपना हॉल टिकट नंबर सही-सही भरें। इसके बाद नीचे दिए गए सबमिट बटन को दबाएं। आपका स्कोरकार्ड यानी अंकों का पूरा विवरण आपके सामने आ जाएगा।

    परीक्षा पास करने के नियम

    इस परीक्षा को पास करने के लिए छात्रों को प्रत्येक विषय में कम से कम पैंतीस प्रतिशत अंक लाने जरूरी हैं। यदि कोई छात्र थ्योरी यानी लिखित परीक्षा और प्रैक्टिकल यानी प्रायोगिक परीक्षा दोनों में शामिल हुआ है, तो उसे दोनों में अलग-अलग पास होना होगा।

    अगर कोई छात्र किसी कारणवश इस बार भी सफल नहीं हो पाता है, तो उसे निराश होने की जरूरत नहीं है। बोर्ड ऐसे छात्रों के लिए आगे के विकल्पों के बारे में जल्द ही नई गाइडलाइन यानी दिशा-निर्देश जारी करेगा।

    बेहतर भविष्य के लिए अगला कदम

    जो छात्र इस परीक्षा में सफल होंगे, वे तुरंत स्नातक यानी कॉलेज की पढ़ाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। डिग्री कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया अभी चल रही है, जिससे इन छात्रों को कोई नुकसान नहीं होगा। प्रथम वर्ष के छात्र सीधे द्वितीय वर्ष की नियमित कक्षाओं में बैठ सकेंगे।

    सभी छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने इंटरनेट वाले अंक पत्र का एक प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें। जब तक मूल अंक पत्र स्कूल से नहीं मिलता, तब तक यह प्रिंटआउट ही हर जगह काम आएगा। मूल दस्तावेज कुछ दिनों बाद आपके विद्यालय से प्राप्त होंगे।

  • भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत: 15 जून के बाद नितिन नवीन की नई टीम का काउंटडाउन शुरू

    भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत: 15 जून के बाद नितिन नवीन की नई टीम का काउंटडाउन शुरू

    भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। 15 जून के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपनी नई टीम की घोषणा कर सकते हैं। जानें पूरी खबर।

    भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर सांगठनिक स्तर पर एक बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यभार संभालने के बाद से ही इस बात की चर्चा थी कि वे अपनी नई टीम कब बनाएंगे। अब वह समय नजदीक आता दिख रहा है और 15 जून के बाद कभी भी नई टीम की घोषणा हो सकती है।

    भाजपा में बड़े बदलाव की तैयारी

    पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस नए सांगठनिक ढांचे को लेकर कई दौर की बैठकें की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की लंबी बातचीत हो चुकी है। इस बातचीत में पार्टी के भविष्य और आगामी सांगठनिक चुनावों को ध्यान में रखा गया है। 15 जून की तारीख के बाद किसी भी दिन नए पदाधिकारियों के नामों का एलान हो सकता है।

    इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पार्टी संगठन को और अधिक गतिशील बनाना है। पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर कई पद खाली पड़े हैं या कुछ नेताओं के पास दोहरी जिम्मेदारियां हैं। नए बदलावों के जरिए काम के बोझ को कम करने और दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्यों के स्तर तक यह फेरबदल देखने को मिलेगा।

    युवाओं को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

    नितिन नवीन खुद पार्टी के सबसे युवा अध्यक्षों में से एक हैं। ऐसे में उनकी नई टीम में युवाओं की भागीदारी काफी अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची में पचास साल से कम उम्र के चेहरों को तरजीह दी जाएगी। इससे संगठन में एक नई ऊर्जा और नया दृष्टिकोण आने की संभावना है।

    युवा नेताओं को आगे लाकर भाजपा भविष्य के नेतृत्व की खेप तैयार करना चाहती है। पार्टी के विभिन्न मोर्चों जैसे युवा मोर्चा और महिला मोर्चा में भी नए और सक्रिय चेहरों को शामिल किया जाएगा। इस कदम से जमीन पर काम करने वाले आम कार्यकर्ताओं को एक बड़ा और सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।

    वरिष्ठ नेताओं की भूमिका तय

    संगठन को मजबूत करने के लिए केवल युवाओं पर ही नहीं बल्कि अनुभवी नेताओं पर भी भरोसा जताया जाएगा। पार्टी के कई पुराने और अनुभवी दिग्गजों को नई टीम में मार्गदर्शक और रणनीतिकार के रूप में बनाए रखा जाएगा। अनुभव और युवा जोश के बीच एक सही संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के असंतोष को रोका जा सकेगा।

    कुछ वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय टीम से हटाकर राज्यों की राजनीति में वापस भेजा जा सकता है। वहीं राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कुछ बड़े चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस प्रकार की अदला-बदली से संगठन को हर स्तर पर मजबूती देने की रणनीति बनाई गई है।

    राज्यों के प्रभारियों में फेरबदल

    भाजपा में बड़े बदलाव के तहत विभिन्न राज्यों के प्रभारियों की सूची में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। कई राज्यों के मौजूदा प्रभारियों को बदला जाएगा क्योंकि उनका कार्यकाल काफी लंबा हो चुका है। नए प्रभारियों को उन राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी जहां पार्टी अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है।

    प्रभारियों के चयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि वे स्थानीय भाषा और संस्कृति को अच्छी तरह समझते हों। इससे केंद्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच समन्वय बेहतर हो सकेगा। इसके साथ ही प्रभारियों को राज्यों में नियमित प्रवास करने के सख्त निर्देश भी दिए जाएंगे ताकि जमीनी हकीकत की सही रिपोर्ट मिलती रहे।

    सोशल इंजीनियरिंग पर बड़ा फोकस

    नई टीम के गठन में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन यानी सोशल इंजीनियरिंग (सामाजिक ताना-बाना) का पूरा ध्यान रखा जाएगा। देश के सभी हिस्सों से कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देने की योजना है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों के नेताओं को आगे लाया जाएगा जहां भाजपा पारंपरिक रूप से कमजोर रही है।

    पिछड़े, दलित और आदिवासी समाज के ऊर्जावान चेहरों को संगठन में मुख्य धारा के पदों पर लाने की तैयारी है। इससे party अपने सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी होने के नारे को जमीन पर सच साबित करना चाहती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं इन सामाजिक समीकरणों की बारीकियों की समीक्षा कर रहे हैं।

    चुनावी राज्यों पर विशेष ध्यान

    आगामी महीनों में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उन पर पार्टी का सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित है। उन राज्यों के लिए विशेष रणनीति बनाई जा रही है और वहां के सांगठनिक ढांचे को पूरी तरह से दुरुस्त किया जाएगा। चुनावी राज्यों के प्रभारियों और सह-प्रभारियों के नामों की घोषणा सबसे पहले की जा सकती है।

    इन राज्यों में सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए पदाधिकारियों की सूची में हर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। पार्टी का लक्ष्य है कि चुनाव की तारीखों के एलान से बहुत पहले ही संगठन पूरी तरह से सक्रिय और मुस्तैद हो जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर फीडबैक यानी कार्यकर्ताओं की राय लेने का काम भी पूरा हो चुका है।

    आगामी रणनीति पर काम शुरू

    नितिन नवीन की नई टीम के सामने केवल आंतरिक बदलाव की ही चुनौती नहीं है, बल्कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटना भी मुख्य काम होगा। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए संगठन एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहा है। इसके लिए नई टीम के सदस्यों को विशेष प्रभार दिए जाएंगे।

    आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में संगठन को डिजिटल रूप से और अधिक मजबूत किया जाएगा। नए पदाधिकारियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जा सकते हैं। 15 जून के बाद शुरू होने वाला यह नया सफर भाजपा की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।

  • नैनीताल में पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा: पूर्व आईजी के पुराने आदेश से मचा हड़कंप, 11 की सैलरी पूरी तरह रुकी

    नैनीताल में पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा: पूर्व आईजी के पुराने आदेश से मचा हड़कंप, 11 की सैलरी पूरी तरह रुकी

    नैनीताल में पूर्व आईजी के एक आदेश के कारण 944 पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा हुआ है, जबकि 11 जवानों की सैलरी पूरी तरह रोक दी गई है। जानें पूरा मामला नैनीताल में पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा:

    नैनीताल में पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा

    उत्तराखंड के नैनीताल जिले में प्रशासनिक महकमे से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक पुराने सरकारी नियम के चलते सैकड़ों पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा हुआ है। इसके कारण पुलिसकर्मियों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    यह पूरा विवाद क्षेत्र के पूर्व आईजी (IG – पुलिस महानिरीक्षक) द्वारा जारी किए गए एक कड़े आदेश के बाद शुरू हुआ है। इस आदेश के तकनीकी पेंच में फंसने के कारण कुल 944 कर्मियों के वेतन भुगतान पर तलवार लटक गई है। इनमें से कुछ लोगों को आंशिक राहत मिली है, लेकिन संकट अभी टला नहीं है।

    नैनीताल में बड़ा प्रशासनिक संकट

    नैनीताल जिले के विभिन्न थानों और चौकियों में तैनात पुलिस के जवान इस समय बेहद परेशान हैं। हर महीने के अंत में मिलने वाली तनख्वाह इस बार उनके खातों में समय पर नहीं पहुंच पाई है। इससे निचले स्तर के कर्मचारियों में काफी असंतोष देखा जा रहा है।

    जिला पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार, वेतन रोकने की यह कार्रवाई किसी विभागीय सजा के तौर पर नहीं की गई है। यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत दस्तावेजों की जांच की जा रही है। लेकिन इस कड़े रुख से मैदानी स्तर पर काम करने वाले जवानों का मनोबल टूट रहा है।

    पूर्व आईजी के आदेश से उलझा मामला

    इस पूरे विवाद की जड़ कुमाऊं परिक्षेत्र के पूर्व आईजी के उस आदेश में छिपी है, जो उन्होंने अपने तबादले से ठीक पहले दिया था। उन्होंने आदेश दिया था कि सभी पुलिसकर्मियों को अपनी संपत्ति और चल-अचल परिसंपत्तियों का पूरा ब्योरा अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होगा।

    इस आदेश को पूरा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई थी। पूर्व पुलिस महानिरीक्षक का मानना था कि इससे विभाग के भीतर पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। लेकिन कई जिलों में इस आदेश का पालन ठीक से नहीं हो पाया, जिससे अब बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।

    सैकड़ों जवानों की बढ़ी परेशानी

    तय तारीख बीत जाने के बाद जब मुख्यालय ने डेटा की समीक्षा की, तो पाया कि नैनीताल जिले के 944 जवानों ने अपनी संपत्तियों की जानकारी अधूरी छोड़ी थी। इसके बाद लेखा विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए इन सभी कर्मियों के वेतन बिलों पर रोक लगा दी।

    इस रोक के कारण जिले के लगभग हर थाने के पुलिसकर्मी प्रभावित हुए हैं। त्योहारों और बच्चों की स्कूल फीस जमा करने के समय पर पैसे न मिलने से जवान मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी इस मामले में अपनी चिंता जताई है।

    ग्यारह कर्मियों की सैलरी पूरी तरह रुकी

    इस बड़े संकट के बीच 11 पुलिसकर्मियों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। इन 11 कर्मचारियों की सैलरी पूरी तरह से ब्लॉक यानी बंद कर दी गई है। जांच में पाया गया कि इन्होंने बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी पोर्टल पर कोई जानकारी साझा नहीं की।

    इन कर्मचारियों के खिलाफ अब कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जब तक ये कर्मी अपने दस्तावेज जमा नहीं करते, तब तक इन्हें वेतन नहीं मिलेगा।

    पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा होने के कारण

    इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण जिले के पुलिस महकमे में काम की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। कई थानों के प्रभारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इस व्यावहारिक समस्या से अवगत कराया है। उनका कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण जवान अपनी ड्यूटी पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

    जवानों का तर्क है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की व्यस्त ड्यूटी के कारण उन्हें ऑनलाइन फॉर्म भरने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कई दुर्गम पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट की सुचारू व्यवस्था न होने से भी यह जानकारी समय पर अपलोड नहीं हो पाई।

    विभाग में समाधान की कोशिशें तेज

    मामले के तूल पकड़ने के बाद अब वर्तमान पुलिस अधिकारियों ने इस संकट को सुलझाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस कप्तान ने सभी प्रभावित 944 कर्मियों को राहत देने के लिए एक विशेष खिड़की यानी हेल्प डेस्क बनाने के निर्देश दिए हैं।

    इस नई व्यवस्था के तहत जिन जवानों का वेतन आंशिक रूप से रुका हुआ है, वे अपने दस्तावेज मैन्युअल रूप से भी जमा कर सकते हैं। विभाग का प्रयास है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर सभी जरूरी जांच पूरी कर ली जाए ताकि अटकी हुई राशि जारी की जा सके।

    वरिष्ठ अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही बैंकों को भुगतान के आदेश भेज दिए जाएंगे। इस कार्रवाई के बाद से अन्य जिलों के पुलिस महकमों में भी हड़कंप मचा हुआ है, और वहां के कर्मचारियों ने भी अपने दस्तावेज पूरे करने तेज कर दिए हैं।

  • गोरखपुर में सिपाही भर्ती परीक्षा में चूक: दो दारोगा सस्पेंड, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    गोरखपुर में सिपाही भर्ती परीक्षा में चूक: दो दारोगा सस्पेंड, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सिपाही भर्ती परीक्षा में चूक के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लापरवाही बरतने के आरोप में दो दारोगा निलंबित कर दिए गए हैं।

    सिपाही भर्ती परीक्षा में चूक

    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा में चूक का एक गंभीर मामला सामने आया है। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था में ढिलाई बरतने के आरोप में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। इस बड़ी लापरवाही के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात दो उपनिरीक्षकों यानी दारोगा को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से परीक्षा ड्यूटी में लगे अन्य कर्मचारियों के बीच कड़ा संदेश गया है। प्रशासन परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

    गोरखपुर में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई

    गोरखपुर के एक प्रमुख परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा मानकों का पालन न करने के कारण यह निलंबन किया गया है। निलंबित किए गए दोनों दारोगा केंद्र के मुख्य प्रवेश द्वार पर तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी हर आने-जाने वाले उम्मीदवार की सघन तलाशी लेने की थी।

    जांच में पाया गया कि उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान आवश्यक सतर्कता नहीं बरती। इसके कारण कुछ संदिग्ध गतिविधियां होने की आशंका बढ़ गई थी। जिले के पुलिस कप्तान ने इस मामले की आंतरिक जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।

    मुख्य गेट पर लापरवाही उजागर

    यह घटना परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले सुबह की पाली में हुई। गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को मेटल डिटेक्टर (धातु खोजने वाले यंत्र) का सही तरीके से उपयोग करना था। लेकिन दोनों अधिकारियों ने उम्मीदवारों की जांच में ढिलाई बरती।

    इस लापरवाही की वजह से कुछ अभ्यर्थी बिना पूरी जांच के ही परिसर के अंदर प्रवेश कर गए। केंद्र व्यवस्थापक ने जब सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज देखी, तो उन्हें इस बड़ी चूक का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना जिले के उच्चाधिकारियों को दी।

    सिपाही भर्ती परीक्षा की सुरक्षा में चूक

    सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और एंट्री गेट पर तैनात अधिकारियों से जवाब मांगा। दारोगा की तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर तत्काल कार्रवाई की गई।

    पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि सिपाही भर्ती परीक्षा में चूक को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करते हुए सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

    परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा कड़ी

    इस बड़ी घटना के बाद गोरखपुर जिले के सभी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया गया है। अब हर केंद्र पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। मुख्य द्वारों पर विशेष चेकिंग दस्ते तैनात किए गए हैं।

    प्रत्येक अभ्यर्थी की तीन स्तरों पर सघन जांच की जा रही है। बायोमेट्रिक (अंगूठे के निशान की जांच) और आधार कार्ड का मिलान बेहद कड़ाई से किया जा रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह की नकल या गड़बड़ी को रोकना है।

    अभ्यर्थियों की बढ़ी परेशानियां

    सुरक्षा व्यवस्था सख्त होने के कारण परीक्षा केंद्रों के बाहर उम्मीदवारों की लंबी लाइनें लग गईं। सघन चेकिंग की वजह से प्रवेश प्रक्रिया में सामान्य से अधिक समय लग रहा था। इससे दूर-दूर से आए कई अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

    भीषण गर्मी के इस मौसम में धूप में खड़े रहने के कारण परीक्षार्थी काफी परेशान नजर आए। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने केंद्रों के बाहर पीने के पानी और छाया की व्यवस्था की थी। उम्मीदवारों ने कहा कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन प्रबंधन और बेहतर हो सकता था।

    आगामी पारियों के लिए निर्देश

    पुलिस भर्ती बोर्ड ने आगामी दिनों में होने वाली अन्य पारियों की परीक्षाओं के लिए नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी जिलाधिकारियों और कप्तानों को निर्देश दिया गया है कि वे स्वयं केंद्रों का औचक निरीक्षण करें।

    ड्यूटी में थोड़ी सी भी ढिलाई बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ सीधे प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। परीक्षा से जुड़े हर तकनीकी उपकरण जैसे जैमर (सिग्नल रोकने वाला यंत्र) की कार्यप्रणाली को दोबारा जांचा जा रहा है। सरकार इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को बेदाग रखना चाहती है।

    सुचारू रूप से संपन्न हुई परीक्षा

    इस शुरुआती अड़चन और कार्रवाई के बाद परीक्षा का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया गया। केंद्र के भीतर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या नकल की शिकायत सामने नहीं आई है। अधिकारियों की मुस्तैदी से परीक्षा की पवित्रता बनी रही।

    सस्पेंशन (निलंबन) की इस कार्रवाई के बाद परीक्षा ड्यूटी में लगे सभी कर्मचारी अत्यधिक सतर्क नजर आ रहे हैं। गोरखपुर पुलिस सोशल मीडिया पर भी लगातार नजर बनाए हुए है ताकि परीक्षा को लेकर कोई अफवाह न फैल सके। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

  • बिहार में सेब की खेती: सीवान के किसान ने उगाए कश्मीरी सेब

    बिहार में सेब की खेती: सीवान के किसान ने उगाए कश्मीरी सेब

    बिहार में सेब की खेती का सफल प्रयोग हुआ है। सीवान के एक किसान ने गर्म मौसम के अनुकूल कश्मीरी सेब उगाकर सबको चौंका दिया है। जानें पूरी कहानी।

    सीवान के किसान ने उगाए कश्मीरी सेब

    बिहार के सीवान जिले से एक बेहद हैरान करने वाली और अच्छी खबर सामने आई है। यहाँ एक प्रगतिशील किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर बिहार में सेब की खेती को हकीकत में बदल दिया है। उन्होंने अपने खेत में कश्मीर जैसे रसीले और लाल सेब पैदा करके कृषि वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया है।

    सीवान के किसान ने किया नया प्रयोग

    यह कमाल सीवान जिले के महाराजगंज प्रखंड के रहने वाले किसान रामेश्वर सिंह ने कर दिखाया है। रामेश्वर हमेशा से कुछ नया करने की चाह रखते थे। उन्होंने पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और धान के बजाय कुछ अलग करने का फैसला लिया।

    उन्होंने दो साल पहले अपने एक छोटे से भूखंड पर सेब के पौधे लगाने की योजना बनाई थी। शुरुआत में गाँव के लोग उनकी इस योजना पर हंसते थे। लोगों का मानना था कि बिहार की गर्म मिट्टी में सेब की पैदावार कभी मुमकिन नहीं है।

    गर्म मौसम वाली खास प्रजाति का चयन

    रामेश्वर सिंह ने हारिमन-99 नाम की सेब की एक विशेष किस्म के पौधे मँगवाए। यह प्रजाति मैदानी और गर्म इलाकों में भी फल देने की क्षमता रखती है। इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 40 से 45 डिग्री तापमान को भी आसानी से बर्दाश्त कर लेता है।

    आमतौर पर पारंपरिक कश्मीरी सेब को बहुत ठंडे मौसम और बर्फबारी की जरूरत होती है। लेकिन वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई इस नई किस्म ने बिहार के किसानों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। रामेश्वर ने तकनीक का सही इस्तेमाल कर इन पौधों की देखभाल की।

    पौधों से मिलने लगा भरपूर फल

    दो साल की कड़ी मेहनत के बाद अब रामेश्वर के बाग में लगे पेड़ों पर लाल-लाल सेब लटकने लगे हैं। इन सेबों का आकार और रंग बिल्कुल वैसा ही है जैसा कश्मीर या हिमाचल के बागानों में देखने को मिलता है। सेब की अच्छी फसल देखकर रामेश्वर का पूरा परिवार बेहद खुश है।

    इस समय उनके बागान में करीब पचास पेड़ पूरी तरह से फलों से लदे हुए हैं। एक-एक पेड़ पर बीस से तीस किलो तक सेब आए हैं। स्थानीय लोग इस अनोखे बाग को देखने के लिए दूर-दूर से रामेश्वर के घर पहुंच रहे हैं।

    जैविक खाद और सिंचाई का सही तरीका

    रामेश्वर सिंह ने बताया कि उन्होंने इस खेती में किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने पूरी तरह से जैविक यानी प्राकृतिक खाद जैसे गोबर की खाद और केंचुए से बनी खाद का इस्तेमाल किया। इससे फलों का स्वाद बेहद मीठा और प्राकृतिक बना हुआ है।

    गर्मियों के दिनों में पौधों को बचाने के लिए उन्होंने सिंचाई की आधुनिक ड्रिप इरीगेशन यानी बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति को अपनाया। इस तकनीक से पौधों की जड़ों को लगातार नमी मिलती रही और पानी की बर्बादी भी नहीं हुई। इसी वजह से तेज धूप में भी पौधे सुरक्षित रहे।

    किसानों के लिए आमदनी का नया जरिया

    बिहार में आम और लीची की खेती तो बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन सेब का उत्पादन एक नई क्रांति की तरह है। कृषि विभाग के अधिकारी भी रामेश्वर के इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे राज्य के अन्य किसानों की आमदनी बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी।

    पारंपरिक खेती में लागत अधिक आती है और मुनाफा सीमित होता है। इसके विपरीत फलदार पौधों की खेती से किसान भाई कम जमीन में भी कई गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। सीवान का यह प्रयोग पूरे बिहार के लिए एक मिसाल बन चुका है।

    कृषि वैज्ञानिकों ने दी अहम सलाह

    स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने रामेश्वर के इस बाग का दौरा किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी की जांच और सही पोषण मिलने से फलों की गुणवत्ता बहुत अच्छी हुई है। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस तकनीक को समझने की सलाह दी है।

    वैज्ञानिकों ने कहा कि शुरुआत में छोटे स्तर पर ही परीक्षण करना चाहिए। मिट्टी और पानी की उपलब्धता को देखकर ही पौधों की संख्या बढ़ानी चाहिए। रामेश्वर सिंह अब अपने आसपास के युवाओं को भी इस आधुनिक खेती की ट्रेनिंग यानी प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहे हैं।

    बाजार में मिल रही अच्छी कीमत

    रामेश्वर के बाग के सेब अब स्थानीय बाजारों में भी पहुंचने लगे हैं। कश्मीरी सेब के मुकाबले स्थानीय स्तर पर ताजा टूटे हुए सेबों को लोग हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि इन सेबों का स्वाद बहुत मीठा और कुरकुरा है।

    बाजार में अच्छी कीमत मिलने से रामेश्वर की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। वे आने वाले समय में अपने इस बागान का दायरा और बढ़ाने वाले हैं। वे बिहार के अन्य जिलों में भी इस पौधे की सप्लाई यानी आपूर्ति करने की योजना बना रहे हैं।

  • गुरुग्राम में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ आधी रात को बड़ी कार्रवाई: झुग्गियों से लेकर होटलों तक भारी पुलिस दबिश

    गुरुग्राम में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ आधी रात को बड़ी कार्रवाई: झुग्गियों से लेकर होटलों तक भारी पुलिस दबिश

    गुरुग्राम में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ पुलिस ने आधी रात को बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया है। झुग्गियों और होटलों में संदिग्धों के दस्तावेजों की जांच की गई।

    गुरुग्राम में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने एक बड़ा और कड़ा अभियान शुरू किया है। शहर के अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा के लिहाज से सोमवार की आधी रात को पुलिस की कई टीमों ने एक साथ भारी दबिश दी। इस कार्रवाई से संदिग्ध इलाकों में हड़कंप मच गया।

    पुलिस के इस अचानक और बड़े एक्शन से अवैध रूप से रह रहे लोगों में हड़कंप मच गया है। कई संदिग्ध इलाकों में रात के अंधेरे में चली इस तलाशी के कारण लोग बेहद सतर्क नजर आए। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।

    आधी रात को पुलिस की छापेमारी

    पुलिस उपायुक्त यानी डीसीपी ईस्ट संदीप के नेतृत्व में पुलिस की बड़ी टीमों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस विशेष अभियान के तहत झुग्गी-झोपड़ियों, स्थानीय कॉलोनियों, किराये के मकानों, औद्योगिक क्षेत्रों तथा होटलों में रह रहे लोगों की बारीकी से जांच की गई। पुलिस के जवान देर रात तक लोगों के पहचान पत्रों की जांच करते रहे।

    इस छापामार कार्रवाई के दौरान संदिग्ध पाए गए व्यक्तियों के पहचान पत्रों और दस्तावेजों का गहराई से मिलान किया गया। जिन लोगों के कागजात अधूरे या जाली होने का संदेह था, उन्हें आगे की जांच के लिए चिह्नित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसी औचक जांच आगे भी जारी रहेगी।

    गुरुग्राम में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश

    गुरुग्राम पुलिस ने कुछ दिनों पहले ही शहर में अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए एक मेगा सर्च ऑपरेशन चलाने की घोषणा की थी। खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस को खबर मिली थी कि कई विदेशी नागरिक बिना किसी वैध वीजा या पासपोर्ट के यहां छिपकर रह रहे हैं। इसके बाद ही इस गुप्त योजना को जमीन पर उतारा गया।

    इस तलाशी अभियान के तहत विशेष रूप से उन इलाकों को घेरा गया जहाँ कम किराए पर लोग रहते हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बिना वैध दस्तावेजों के भारत में निवास करने वाले किसी भी विदेशी नागरिक को बख्शा नहीं जाएगा। पकड़े गए संदिग्धों के खिलाफ विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत सख्त कानूनी धाराओं में मामला दर्ज किया जा रहा है।

    झुग्गियों और होटलों में गहन चेकिंग

    पुलिस की टीमों ने सेक्टर 49 और उसके आसपास बनी झुग्गी बस्तियों में तड़के तक तलाशी अभियान चलाया। इसके साथ ही हाईवे के पास बने छोटे होटलों और ढाबों पर काम करने वाले कर्मचारियों के दस्तावेजों को भी खंगाला गया। होटल संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति को बिना पुख्ता आईडी के कमरा न दें।

    इस अभियान के दौरान पुलिस ने स्थानीय निवासियों की समिति यानी आरडब्ल्यूए से भी संपर्क साधा है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने घरों में काम करने वाले नौकरों, चालकों और सफाई कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन जरूर करवाएं। ऐसा न करने वाले मकान मालिकों के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

    आम नागरिकों से सहयोग की अपील

    गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता संदीप तुरान ने मीडिया को बताया कि यह अभियान पूरी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पड़ोस में कोई संदिग्ध व्यक्ति या विदेशी नागरिक अवैध रूप से रहता हुआ दिखाई दे, तो तुरंत पुलिस को खबर दें। इसके लिए नागरिक सीधे हेल्पलाइन नंबर 112 पर फोन कर सकते हैं।

    मदद के लिए बनाए गए इस नंबर पर आने वाली हर सूचना को पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा। पुलिस ने आम जनता को भरोसा दिलाया है कि इस अभियान से किसी भी वैध भारतीय नागरिक को परेशान नहीं किया जाएगा। यह जांच केवल उन घुसपैठियों की पहचान करने के लिए है जो देश के नियमों का उल्लंघन करके यहां रह रहे हैं।

    अफवाह फैलाने वालों पर होगी जेल

    इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक जानकारियां और वीडियो प्रसारित होने की खबरें भी सामने आ रही हैं। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इंटरनेट पर किसी भी प्रकार की झूठी या मनगढ़ंत अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। साइबर सेल की टीम ऐसे संदेशों पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

    अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या डर का माहौल पैदा करने वाले किसी भी शरारती तत्व के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से कहा है कि वे केवल आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें। शहर में शांति और आपसी भाईचारा बनाए रखना पुलिस की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

    पिछले अभियानों से सीख और बदलाव

    पिछले साल भी इसी तरह के एक चेकिंग अभियान के दौरान कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था। उस समय बड़े पैमाने पर कागजात की जांच की गई थी और कुछ लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। इस बार पुलिस ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है ताकि आम कामकाजी वर्ग को कोई असुविधा न हो।

    इस बार पुलिस की टीमें घर-घर जाकर सीधे बातचीत कर रही हैं और किसी भी प्रकार का अस्थाई हिरासत केंद्र नहीं बनाया गया है। कानूनी प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है। संदिग्ध पाए जाने पर व्यक्ति को सीधे सक्षम प्राधिकारी के सामने पेश किया जा रहा है ताकि मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

    संदिग्ध इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

    इस कार्रवाई के बाद से गुरुग्राम के सीमावर्ती और औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है। पुलिस की पीसीआर यानी पुलिस कंट्रोल रूम की गाड़ियां लगातार गश्त लगा रही हैं। रात के समय संदिग्ध वाहनों की चेकिंग भी बढ़ा दी गई है ताकि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति पुलिस की नजरों से बचकर भाग न सके।

    स्थानीय प्रशासन और खुफिया विभाग के अधिकारी भी इस पूरे मामले में पुलिस का लगातार साथ दे रहे हैं। आने वाले दिनों में शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और नई सोसायटियों में भी इसी प्रकार का सघन जांच अभियान चलाने की योजना तैयार की गई है।

    मकान मालिकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश

    पुलिस ने साफ किया है कि जो मकान मालिक अपने किराएदारों का रिकॉर्ड नहीं रखते, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय है। सभी रिहायशी सोसायटियों और झुग्गी क्षेत्रों के ठेकेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का ब्योरा पुलिस के पास जमा करें। ऐसा न करने पर इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए गुरुग्राम पुलिस डिजिटल माध्यमों का भी सहारा ले रही है। मकान मालिक घर बैठे ही ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपने किराएदारों और घरेलू सहायकों का सत्यापन फॉर्म भर सकते हैं। इस आधुनिक व्यवस्था से आम लोगों का समय बचेगा और सुरक्षा तंत्र भी मजबूत होगा।

  • दिल्ली में खराब मौसम का असर: राजधानी आ रहे तीन विमान लखनऊ डायवर्ट किए गए

    दिल्ली में खराब मौसम का असर: राजधानी आ रहे तीन विमान लखनऊ डायवर्ट किए गए

    दिल्ली में खराब मौसम का असर देखने को मिला है। तेज आंधी और बारिश के कारण दिल्ली आ रहे तीन विमानों का रास्ता बदलकर उन्हें लखनऊ भेजा गया। जानें पूरी खबर।

    दिल्ली में खराब मौसम का असर

    दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में अचानक मौसम का मिजाज बदल गया है। इस खराब मौसम का असर हवाई यातायात पर सबसे ज्यादा पड़ा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने वाले तीन विमानों का रास्ता बदलना पड़ा।

    इन विमानों को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा गया। मौसम विभाग ने पहले ही तेज हवाओं और बारिश की चेतावनी जारी की थी। अचानक आई तेज आंधी के कारण पायलटों को विमान उतारने में काफी परेशानी हो रही थी।

    यात्रियों को उठानी पड़ी भारी परेशानी

    दिल्ली आ रहे यात्रियों को इस अचानक आए बदलाव के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। विमानों के रास्ता बदलने से सैकड़ों यात्री लखनऊ एयरपोर्ट पर फंस गए। एयरलाइन कंपनियों ने यात्रियों को राहत पहुंचाने के लिए इंतजाम शुरू कर दिए हैं।

    लखनऊ उतरे विमानों में सवार लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए परेशान दिखे। हवाई अड्डा प्रशासन ने यात्रियों के बैठने और खाने-पीने की विशेष व्यवस्था की है। मौसम साफ होते ही इन विमानों को वापस दिल्ली के लिए रवाना किया जाएगा।

    आसमान में चक्कर काटते रहे विमान

    दिल्ली हवाई अड्डे के पास हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि विमानों का संतुलन बिगड़ रहा था। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC – हवाई यातायात नियंत्रण कक्ष) ने सुरक्षा को देखते हुए विमानों को हवा में ही रुकने को कहा। कुछ विमानों ने दो से तीन बार उतरने का प्रयास भी किया।

    जब दिल्ली के आसमान में दृश्यता बहुत कम हो गई, तब लैंडिंग (Landing – विमान का जमीन पर उतरना) असुरक्षित मान ली गई। ईंधन की कमी और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पायलटों ने लखनऊ जाने का फैसला किया। हवाई पट्टी पर तेज हवा के कारण यह कदम उठाना बेहद जरूरी था।

    विमानों के डायवर्जन का पूरा ब्योरा

    लखनऊ डायवर्ट किए गए विमानों में निजी और सरकारी एयरलाइंस कंपनियां शामिल हैं। मुंबई और गोवा से दिल्ली आ रही फ्लाइट्स (Flights – हवाई जहाज की उड़ानें) को लखनऊ भेजा गया। इसके साथ ही एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान का रास्ता भी बदला गया है।

    अधिकारियों के अनुसार, इंडिगो और एयर इंडिया के विमानों को लखनऊ की तरफ मोड़ा गया। इन विमानों में करीब 500 से अधिक यात्री सवार थे। लखनऊ हवाई अड्डे पर अचानक बढ़े इस यातायात को संभालने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

    खराब मौसम का असर और उड़ानें प्रभावित

    उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस समय पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इस वजह से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धूल भरी आंधी और तेज बारिश हो रही है। इस खराब मौसम का असर न केवल उड़ानों पर बल्कि सड़कों पर भी देखा जा रहा है।

    दिल्ली हवाई अड्डे के अधिकारियों ने बताया कि इस आंधी के कारण लगभग 50 अन्य उड़ानें भी अपने तय समय से देरी से चल रही हैं। आने वाले कुछ घंटों तक यह स्थिति बनी रह सकती है। यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी उड़ान का स्टेटस (Status – स्थिति) जरूर जांच लें।

    मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 48 घंटों तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहेगा। तेज रफ्तार हवाओं के साथ कुछ जगहों पर ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है।

    इस बदलाव से पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से लोगों को राहत तो मिली है, लेकिन हवाई सफर करने वालों के लिए यह मुसीबत बन गया है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी तेज हवाएं चली हैं, जिससे प्रशासन चौकन्ना हो गया है।

    हवाई अड्डा प्रशासन मुस्तैद

    लखनऊ और दिल्ली दोनों ही हवाई अड्डों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। तकनीकी टीमें लगातार मौसम की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। जैसे ही दिल्ली में हवा की गति सामान्य होगी, डायवर्ट किए गए विमानों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।

    विमान कंपनियों ने सोशल मीडिया के जरिए यात्रियों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा है कि उनके लिए यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है। लखनऊ में उतरे यात्रियों को वैकल्पिक साधनों या उसी विमान से दिल्ली पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

  • SEO हिंदी हेडलाइन पीएम मोदी का नया कीर्तिमान: देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी, बीजेपी मनाएगी जश्न

    SEO हिंदी हेडलाइन पीएम मोदी का नया कीर्तिमान: देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी, बीजेपी मनाएगी जश्न

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4,399 दिनों तक पद पर रहकर सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जानें पूरी खबर।

    सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी

    भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज एक नया और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। देश के शासन प्रमुख के रूप में पीएम मोदी का नया कीर्तिमान सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

    नरेंद्र मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक बहुत पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद भारतीय जनता पार्टी ने देश भर में बड़े जश्न और कार्यक्रमों का एक विशेष प्लान तैयार किया है। नई दिल्ली में बीजेपी और अन्य सहयोगी दलों के नेता मिलकर प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत करने जा रहे हैं।

    नेहरू का दशकों पुराना रिकॉर्ड टूटा

    पंडित जवाहरलाल नेहरू का निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कुल कार्यकाल 4,398 दिनों का था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लगातार 4,399वें दिन पद पर बने रहकर इस आंकड़े को पार कर लिया है। इसके साथ ही वे देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।

    कई लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि पंडित नेहरू तो लगभग 17 साल देश के प्रधानमंत्री रहे थे, फिर यह रिकॉर्ड कैसे टूटा। इसका गणित बहुत सीधा और साफ है, क्योंकि यहाँ पर केवल जनता द्वारा पूरी तरह से चुने गए कार्यकाल को ही गिना जा रहा है।

    पंडित नेहरू साल 1947 में आजादी के बाद बनी अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री थे, जिसके लिए कोई चुनाव नहीं हुआ था। देश में पहला आम चुनाव साल 1951-52 में आयोजित किया गया था। इस वजह से उनका निर्वाचित कार्यकाल साल 1952 से शुरू होकर 1964 में उनके निधन तक ही माना जाता है।

    निरंतर जनसेवा और कड़ा परिश्रम

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2014 में भारी बहुमत के साथ देश की सत्ता में चुनकर आए थे। इसके बाद साल 2019 और फिर साल 2024 के आम चुनाव में भी जनता ने उन पर अपना पूरा भरोसा जताया। उनका यह पूरा कार्यकाल जनता द्वारा सीधे तौर पर चुनी गई सरकारों का रहा है।

    पीएम मोदी के नाम सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक सेवा करने के कई अन्य रिकॉर्ड भी दर्ज हैं। इसी साल मार्च के महीने में उन्होंने देश के किसी भी सरकार के प्रमुख के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने का गौरव हासिल किया था। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में कुल 24 साल से अधिक की सेवा पूरी की है।

    प्रधानमंत्री ने इस खास मौके पर सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश भी साझा किया है। उन्होंने लिखा कि जनता की सेवा करना ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी होती है। उन्होंने देश के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे पूरी विनम्रता और समर्पण के साथ काम करते रहेंगे।

    पीएम मोदी का नया कीर्तिमान और जश्न

    इस ऐतिहासिक सफलता को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए बीजेपी ने एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने मिलकर इस विशेष उत्सव की पूरी रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत देश के सभी राज्यों और जिलों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    नई दिल्ली में आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के सभी घटक दलों की एक बड़ी बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सभी केंद्रीय मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष अभिनंदन करेंगे। पार्टी इस मौके पर एक धन्यवाद प्रस्ताव भी पास करने जा रही है।

    बीजेपी के कार्यकर्ता देश के हर बूथ स्तर पर जाकर प्रधानमंत्री की इस उपलब्धि और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार करेंगे। इसके लिए विशेष होर्डिंग्स, सोशल मीडिया अभियान और जनसभाओं का सहारा लिया जाएगा। पार्टी इस दिन को सुशासन और सेवा दिवस के रूप में मनाने की तैयारी में है।

    देश भर से मिल रही बधाइयाँ

    इस कीर्तिमान के सामने आने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया भर के बड़े नेताओं से लगातार बधाई संदेश मिल रहे हैं। पड़ोसी देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों ने भारत की विकास यात्रा और पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व की जमकर तारीफ की है। वैश्विक मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव को भी सराहा गया है।

    देश के भीतर भी विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और समाज के गणमान्य लोगों ने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दी हैं। केंद्रीय मंत्रियों ने अपने बयानों में कहा कि पीएम मोदी ने बिना एक भी दिन छुट्टी लिए पिछले 24 सालों से लगातार देश और राज्यों की सेवा की है, जो अपने आप में एक मिसाल है।

    बुनियादी ढांचे और शिक्षा में बड़ा बदलाव

    पिछले 12 सालों के दौरान भारत के प्रशासनिक और विकास के ढांचे में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2014 से लेकर साल 2026 तक देश में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। देश में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर अब 23 हो चुकी है।

    इसके साथ ही भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम की संख्या भी 13 से बढ़कर 21 हो गई है। देश के गरीब और मध्यम वर्ग को बेहतर इलाज देने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स की संख्या को भी 7 से बढ़ाकर 23 किया जा चुका है। यह आंकड़े देश के बदलते बुनियादी ढांचे की गवाही देते हैं।

    तकनीक और डिजिटल क्रांति का दौर

    पीएम मोदी के इस कार्यकाल को देश में डिजिटल क्रांति के युग के रूप में भी याद किया जाएगा। सरकार ने जन धन खाता, आधार कार्ड और मोबाइल फोन की तकनीक को मिलाकर एक पारदर्शी व्यवस्था तैयार की है। इससे सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना किसी बिचौलिए के पहुंच रहा है।

    गरीबों के कल्याण के लिए शुरू की गई उज्ज्वला योजना से देश की 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को धुएँ से मुक्ति मिली है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पिछले सालों में करोड़ों परिवारों को पक्के मकान दिए जा चुके हैं। सरकार की नीतियां समाज के सबसे आखिरी व्यक्ति तक मदद पहुंचाने पर केंद्रित रही हैं।

    बदलते भारत की नई राजनीतिक दिशा

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की राजनीति को एक नया मोड़ दिया है। वे पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाई है। चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों और गठबंधन की राजनीति के बीच भी उन्होंने देश को एक स्थिर सरकार दी है।

    आज के समय में जब मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए सरकार के हर फैसले की चौबीसों घंटे समीक्षा होती है, तब ऐसा जनविश्वास बनाए रखना बहुत बड़ी बात है। पंडित नेहरू के दौर में देश की राजनीतिक परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं, लेकिन आज के इस प्रतिस्पर्धी दौर में पीएम मोदी ने खुद को सबसे मजबूत नेता साबित किया है।

  • मध्य प्रदेश में कांग्रेस का सियासी दांव फेल, मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने से मचा हड़कंप

    मध्य प्रदेश में कांग्रेस का सियासी दांव फेल, मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने से मचा हड़कंप

    मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। हलफनामे में जानकारी छिपाने के कारण मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द कर दिया गया है।

    मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द

    मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने के कारण कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। निर्वाचन अधिकारी ने उनके पर्चे में गंभीर कानूनी कमियां पाईं।

    इस कड़े फैसले के बाद भोपाल से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल बेहद तेज हो चुकी है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इसे नियमों के तहत हुई सही कार्रवाई बता रही है। इस घटना से विपक्षी खेमे में भारी मायूसी छा गई है।

    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द

    राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान यह बड़ा फैसला सामने आया। जांच के वक्त कांग्रेस उम्मीदवार के दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां पाई गईं। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने मामले की गहराई से समीक्षा की और कांग्रेस के एकमात्र पर्चे को पूरी तरह खारिज कर दिया।

    बीजेपी के नेताओं ने कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया गया था। निर्वाचन अधिकारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंततः नामांकन रद्द करने का लिखित आदेश जारी कर दिया।

    हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप

    कांग्रेस प्रत्याशी पर चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ चल रहे एक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगा है। सर्वोच्च न्यायालय के साफ नियम हैं कि उम्मीदवार को अपने सभी कानूनी मामलों की जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। लेकिन मीनाक्षी नटराजन के शपथ पत्र में इसका कोई उल्लेख नहीं था।

    बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट और उनके वकीलों ने इस चूक को पकड़ लिया। उन्होंने चुनाव आयोग के सामने पुख्ता सबूत पेश किए कि उम्मीदवार के खिलाफ मामला अदालत में विचाराधीन है। इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर यानी निर्वाचन अधिकारी ने यह सख्त कदम उठाया।

    तेलंगाना के पुराने मामले से जुड़ा विवाद

    यह पूरा कानूनी विवाद तेलंगाना के हैदराबाद की एक स्थानीय अदालत से जुड़ा हुआ है। वहां साल 2022 के एक पुराने मामले को लेकर साल 2025 में एक निजी शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत में कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और नेताओं के नाम शामिल किए गए थे।

    इस मामले में मीनाक्षी नटराजन को भी अदालत की तरफ से एक कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। बीजेपी का दावा है कि उम्मीदवार को इस केस की पूरी जानकारी थी, फिर भी इसे जानबूझकर छिपाया गया। वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह केवल एक नोटिस था, कोई एफआईआर नहीं थी।

    मध्य प्रदेश में बदला राज्यसभा का गणित

    इस बड़े घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों का पूरा गणित एकदम बदल गया है। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से बीजेपी के पास दो सीटें आसानी से जीतने के लिए पर्याप्त विधायक मौजूद थे। लेकिन तीसरी सीट के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद थी।

    बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के अलावा महेश केवट को भी मैदान में उतारा था। अब कांग्रेस उम्मीदवार का पत्ता साफ होने के बाद बीजेपी की राह पूरी तरह निष्कंटक हो गई है। बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों का अब निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।

    कांग्रेस विधायकों की बाड़ेबंदी का ड्रामा

    नामांकन पत्र खारिज होने से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को लेकर काफी डरी हुई थी। पार्टी को डर था कि उनके विधायक चुनाव के दौरान पाला बदल सकते हैं। इसी वजह से सभी विधायकों को भोपाल से चार्टर्ड प्लेन के जरिए बेंगलुरु भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी थी।

    तमाम विधायक हवाई अड्डे पर पहुंच चुके थे और विमान उड़ान भरने ही वाला था। तभी अचानक दिल्ली और भोपाल से नामांकन रद्द होने की खबर आ गई। इसके तुरंत बाद विधायकों को एयरपोर्ट से वापस बुला लिया गया और बाड़ेबंदी का पूरा प्लान धरा का धरा रह गया।

    बीजेपी और कांग्रेस में छिड़ी सियासी जंग

    इस फैसले के आते ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा कानून से ऊपर उठकर काम करना चाहती है, लेकिन इस बार वह पकड़ी गई।

    दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने बीजेपी पर सरकारी संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से एक राजनीतिक साजिश है जिसके तहत हमारी ईमानदार उम्मीदवार को परेशान किया रहा है। कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ अदालत जाने का मन बना रही है।

    चुनाव आयोग के दफ्तर पर प्रदर्शन

    यह विवाद केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचा। इस दल में जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल और सचिन पायलट जैसे दिग्गज शामिल थे।

    कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके विरोध में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने आयोग के दफ्तर के बाहर ही सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन की वजह से दिल्ली की राजनीति में भी भारी उबाल देखने को मिल रहा है।

  • राज्यसभा में भाजपा का दबदबा बढ़ा: विपक्ष का कुनबा सिमटा, दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंची बीजेपी

    राज्यसभा में भाजपा का दबदबा बढ़ा: विपक्ष का कुनबा सिमटा, दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंची बीजेपी

    संसद के उच्च सदन राज्यसभा में भाजपा का दबदबा लगातार मजबूत हो रहा है। विपक्षी खेमे के सिमटने से बीजेपी अब दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गई है।

    राज्यसभा में भाजपा का दबदबा

    भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में भाजपा का दबदबा लगातार मजबूत होता जा रहा है। हालिया राजनीतिक बदलावों और राज्यों में मिली जीत के बाद विपक्षी दलों का खेमा लगातार कमजोर हो रहा है। अब सत्ताधारी पार्टी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उस जादुई आंकड़े के बेहद करीब आ गई है, जहां से बड़े फैसले लेना आसान हो जाता है।

    संसद के इस सदन में सीटों की स्थिति तेजी से बदली है। विपक्ष के कई बड़े नेता अब सदन से बाहर हो चुके हैं या उनकी पार्टियों की ताकत कम हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव से आने वाले दिनों में देश की राजनीति को एक नई दिशा मिलेगी।

    संसद में बदला सीटों का गणित

    राज्यसभा में कुल सीटों की संख्या 245 है। किसी भी सामान्य कानून को पास कराने के लिए बहुमत यानी आधे से अधिक सीटों की आवश्यकता होती है। भाजपा ने अपने दम पर और एनडीए (NDA – राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के सहयोगियों के साथ मिलकर इस आंकड़े को बहुत पहले ही पार कर लिया था।

    अब स्थिति यह है कि भाजपा नीत गठबंधन 150 सीटों के आंकड़े की तरफ बढ़ रहा है। विपक्ष के पास अब इतनी संख्या भी नहीं बची है कि वह सरकार के किसी फैसले को आसानी से रोक सके। इस नए गणित ने संसद के भीतर सत्ता पक्ष को बेहद मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है।

    सदन के भीतर मनोनीत सदस्यों की भूमिका भी अब अहम हो गई है। राष्ट्रपति द्वारा चुने जाने वाले ये सदस्य भी अक्सर सरकार की नीतियों का समर्थन करते हैं। इस वजह से विपक्षी दलों के लिए सदन के भीतर कोई भी बड़ा विरोध प्रदर्शन करना या वोटिंग में जीतना नामुमकिन जैसा हो गया है।

    राज्यसभा में भाजपा का दबदबा और उसकी ताकत

    सदन के भीतर अकेले भाजपा के सदस्यों की संख्या अब 115 से ऊपर निकल चुकी है। जब इसमें सहयोगी दलों के सांसदों को जोड़ दिया जाता है, तो यह आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाता है। दो-तिहाई बहुमत यानी वह विशेष संख्या बल जो देश के संविधान में बड़ा बदलाव करने के लिए जरूरी होता है।

    इस ताकत के आ जाने से सरकार को अब किसी बाहरी दल के सामने झुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहले कई मौकों पर सरकार को क्षेत्रीय दलों की शर्तों को मानना पड़ता था। लेकिन अब भाजपा अपने सहयोगियों के भरोसे ही किसी भी प्रस्ताव को आसानी से पास कराने की स्थिति में आ चुकी है।

    सदन के संचालन में भी अब सत्ता पक्ष को किसी तरह की बड़ी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ता। उपसभापति और सभापति के नियमों के तहत होने वाली कार्रवाइयों से सदन का कामकाज अब सुचारू रूप से चलता है। विपक्ष के हंगामे का असर अब वोटिंग के नतीजों पर नहीं पड़ता है।

    विपक्षी दलों की चिंताएं बढ़ीं

    दूसरी तरफ विपक्षी खेमे यानी इंडिया (INDIA) गठबंधन के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के पास अब राज्यसभा में केवल 30 के आसपास सीटें बची हैं। क्षेत्रीय दलों जैसे तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की ताकत भी सीमित हो गई है।

    विपक्ष का कुनबा सिमटने से अब सदन में बहस के दौरान उनकी आवाज कमजोर पड़ने लगी है। कई मौकों पर विपक्षी दल एकजुट होकर भी सरकार का विरोध करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। क्षेत्रीय पार्टियों के कुछ सांसदों के पाला बदलने से भी विपक्ष को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

    विपक्षी नेताओं को अब डर है कि सरकार उनकी सहमति के बिना भी कई कड़े कानून लागू कर सकती है। संसद की स्थायी समितियों में भी अब विपक्ष का प्रतिनिधित्व पहले के मुकाबले काफी घट गया है। इससे नीतियों की समीक्षा करने की उनकी शक्ति पर सीधा असर पड़ा है।

    राज्यों के चुनाव का सीधा असर

    राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे जनता नहीं करती है। इसके लिए राज्यों की विधानसभा के सदस्य यानी विधायक (MLA) वोट डालते हैं। पिछले कुछ समय में देश के जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वहां भाजपा को बड़ी सफलता मिली है।

    मध्य प्रदेश, राजस्थान, और गुजरात जैसे बड़े राज्यों में भाजपा की मजबूत सरकारों के कारण वहां से खाली होने वाली सीटें सीधे भाजपा के खाते में जा रही हैं। वहीं उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य से भी विपक्ष के हाथ से सीटें फिसलती जा रही हैं। यही वजह है कि उच्च सदन में भाजपा की स्थिति हर महीने और मजबूत होती जा रही है।

    महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में हुए हालिया राजनीतिक गठबंधनों ने भी भाजपा के पक्ष में काम किया है। वहां के सत्ताधारी दलों के गठबंधन से राज्यसभा सीटों के चुनाव में विपक्ष को तगड़ा झटका लगा है। आने वाले समय में होने वाले अन्य राज्यों के चुनाव भी इसी ट्रेंड की तरफ इशारा कर रहे हैं।

    बड़े विधेयकों को पास कराना आसान

    सरकार जब भी कोई नया नियम या कानून बनाना चाहती है, तो उसे एक विधेयक यानी प्रस्ताव के रूप में संसद में लाती है। किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पास होना जरूरी होता है। लोकसभा में सरकार के पास पहले से ही पर्याप्त संख्या मौजूद है।

    पहले राज्यसभा में संख्या कम होने के कारण कई महत्वपूर्ण कानून सालों तक अटके रहते थे। लेकिन अब बदले हुए माहौल में सरकार अपने बड़े और कड़े फैसलों से जुड़े प्रस्तावों को बिना किसी रुकावट के पास करा सकेगी। इससे विकास कार्यों और नीतिगत बदलावों को जमीन पर उतारने में तेजी आएगी।

    आर्थिक सुधारों से लेकर आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर अब सरकार बिना किसी हिचकिचाहट के कदम बढ़ा सकती है। वन नेशन वन इलेक्शन (एक देश एक चुनाव) और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर भी अब कानूनी रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। इन बड़े फैसलों के लिए आवश्यक कानूनी ड्राफ्ट अब आसानी से मंजूर हो सकते हैं।

    उच्च सदन में नया राजनीतिक समीकरण

    इस नए राजनीतिक समीकरण से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जो क्षेत्रीय दल पहले संसद में अपनी शर्तों पर सरकार को नचाते थे, उनकी ताकत अब नाममात्र की रह गई है। बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों की सीटें कम होने से भी सत्ता पक्ष को फायदा मिला है।

    संसद के इतिहास में यह बहुत कम मौकों पर देखा गया है जब किसी एक दल का प्रभाव दोनों सदनों में इतना व्यापक हो गया हो। यह स्थिति आगामी आम चुनावों तक भाजपा को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त भी प्रदान करती है। विपक्षी खेमे को अब अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करना होगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह दबदबा आने वाले कई सालों तक बरकरार रह सकता है। राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी पूरी तरह भंग नहीं होता, बल्कि इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। इसलिए इस सदन में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक जीत मानी जाती है।