नैनीताल में पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा: पूर्व आईजी के पुराने आदेश से मचा हड़कंप, 11 की सैलरी पूरी तरह रुकी

नैनीताल में पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा: पूर्व आईजी के पुराने आदेश से मचा हड़कंप

नैनीताल में पूर्व आईजी के एक आदेश के कारण 944 पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा हुआ है, जबकि 11 जवानों की सैलरी पूरी तरह रोक दी गई है। जानें पूरा मामला नैनीताल में पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा:

नैनीताल में पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में प्रशासनिक महकमे से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक पुराने सरकारी नियम के चलते सैकड़ों पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा हुआ है। इसके कारण पुलिसकर्मियों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

यह पूरा विवाद क्षेत्र के पूर्व आईजी (IG – पुलिस महानिरीक्षक) द्वारा जारी किए गए एक कड़े आदेश के बाद शुरू हुआ है। इस आदेश के तकनीकी पेंच में फंसने के कारण कुल 944 कर्मियों के वेतन भुगतान पर तलवार लटक गई है। इनमें से कुछ लोगों को आंशिक राहत मिली है, लेकिन संकट अभी टला नहीं है।

नैनीताल में बड़ा प्रशासनिक संकट

नैनीताल जिले के विभिन्न थानों और चौकियों में तैनात पुलिस के जवान इस समय बेहद परेशान हैं। हर महीने के अंत में मिलने वाली तनख्वाह इस बार उनके खातों में समय पर नहीं पहुंच पाई है। इससे निचले स्तर के कर्मचारियों में काफी असंतोष देखा जा रहा है।

जिला पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार, वेतन रोकने की यह कार्रवाई किसी विभागीय सजा के तौर पर नहीं की गई है। यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत दस्तावेजों की जांच की जा रही है। लेकिन इस कड़े रुख से मैदानी स्तर पर काम करने वाले जवानों का मनोबल टूट रहा है।

पूर्व आईजी के आदेश से उलझा मामला

इस पूरे विवाद की जड़ कुमाऊं परिक्षेत्र के पूर्व आईजी के उस आदेश में छिपी है, जो उन्होंने अपने तबादले से ठीक पहले दिया था। उन्होंने आदेश दिया था कि सभी पुलिसकर्मियों को अपनी संपत्ति और चल-अचल परिसंपत्तियों का पूरा ब्योरा अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होगा।

इस आदेश को पूरा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई थी। पूर्व पुलिस महानिरीक्षक का मानना था कि इससे विभाग के भीतर पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। लेकिन कई जिलों में इस आदेश का पालन ठीक से नहीं हो पाया, जिससे अब बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।

सैकड़ों जवानों की बढ़ी परेशानी

तय तारीख बीत जाने के बाद जब मुख्यालय ने डेटा की समीक्षा की, तो पाया कि नैनीताल जिले के 944 जवानों ने अपनी संपत्तियों की जानकारी अधूरी छोड़ी थी। इसके बाद लेखा विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए इन सभी कर्मियों के वेतन बिलों पर रोक लगा दी।

इस रोक के कारण जिले के लगभग हर थाने के पुलिसकर्मी प्रभावित हुए हैं। त्योहारों और बच्चों की स्कूल फीस जमा करने के समय पर पैसे न मिलने से जवान मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी इस मामले में अपनी चिंता जताई है।

ग्यारह कर्मियों की सैलरी पूरी तरह रुकी

इस बड़े संकट के बीच 11 पुलिसकर्मियों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। इन 11 कर्मचारियों की सैलरी पूरी तरह से ब्लॉक यानी बंद कर दी गई है। जांच में पाया गया कि इन्होंने बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी पोर्टल पर कोई जानकारी साझा नहीं की।

इन कर्मचारियों के खिलाफ अब कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जब तक ये कर्मी अपने दस्तावेज जमा नहीं करते, तब तक इन्हें वेतन नहीं मिलेगा।

पुलिसकर्मियों का वेतन फंसा होने के कारण

इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण जिले के पुलिस महकमे में काम की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। कई थानों के प्रभारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इस व्यावहारिक समस्या से अवगत कराया है। उनका कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण जवान अपनी ड्यूटी पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

जवानों का तर्क है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की व्यस्त ड्यूटी के कारण उन्हें ऑनलाइन फॉर्म भरने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कई दुर्गम पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट की सुचारू व्यवस्था न होने से भी यह जानकारी समय पर अपलोड नहीं हो पाई।

विभाग में समाधान की कोशिशें तेज

मामले के तूल पकड़ने के बाद अब वर्तमान पुलिस अधिकारियों ने इस संकट को सुलझाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस कप्तान ने सभी प्रभावित 944 कर्मियों को राहत देने के लिए एक विशेष खिड़की यानी हेल्प डेस्क बनाने के निर्देश दिए हैं।

इस नई व्यवस्था के तहत जिन जवानों का वेतन आंशिक रूप से रुका हुआ है, वे अपने दस्तावेज मैन्युअल रूप से भी जमा कर सकते हैं। विभाग का प्रयास है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर सभी जरूरी जांच पूरी कर ली जाए ताकि अटकी हुई राशि जारी की जा सके।

वरिष्ठ अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही बैंकों को भुगतान के आदेश भेज दिए जाएंगे। इस कार्रवाई के बाद से अन्य जिलों के पुलिस महकमों में भी हड़कंप मचा हुआ है, और वहां के कर्मचारियों ने भी अपने दस्तावेज पूरे करने तेज कर दिए हैं।

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