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  • रामलला के चढ़ावे का हिसाब कैसे रखा जाता है और कहाँ दिखी गड़बड़ी, जानें राम मंदिर विवाद की पूरी सच्चाई

    रामलला के चढ़ावे का हिसाब कैसे रखा जाता है और कहाँ दिखी गड़बड़ी, जानें राम मंदिर विवाद की पूरी सच्चाई

    अयोध्या राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे का हिसाब-किताब कैसे होता है? जानें दान पेटियों से करोड़ों रुपये गायब होने के आरोपों और ट्रस्ट की सफाई की पूरी सच्चाई।

    अयोध्या राम मंदिर में गड़बड़ी के दावों की सच्चाई

    अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे का हिसाब अब देश की राजनीति और आम जनता के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने मंदिर के खजाने में करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी होने की गंभीर आशंका जताई है। इन आरोपों के सामने आने के बाद से श्रद्धालुओं के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं कि आखिर मंदिर को मिलने वाले दान का प्रबंधन कैसे होता है।

    दान राशि पर छिड़ा नया सियासी विवाद

    समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सोशल मीडिया पर मंदिर प्रशासन को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का दावा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान पेटियों में चढ़ाए गए पैसों में से लगभग पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये गायब पाए गए हैं। उन्होंने इस मामले में अदालत से सीधे हस्तक्षेप करने और पूरी जांच कराने की मांग की है।

    इस विवाद के बढ़ने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर बहुत तेज हो चुका है। विपक्ष ने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं और इसे करोड़ों सनातनी भाई-बहनों की आस्था से खिलवाड़ बताया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि उन्हें अभी तक पैसे गायब होने की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।

    रामलला के चढ़ावे का हिसाब और प्रक्रिया

    राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए करीब चार दर्जन से अधिक बड़ी दान पेटियां लगाई गई हैं। इन पेटियों में देश-विदेश से आने वाले भक्त नकद राशि, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं अर्पित करते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि चढ़ावे के प्रबंधन के लिए एक बेहद मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनाई गई है।

    दान पेटियों से मिलने वाली रकम को एक बेहद सुरक्षित और गोपनीय कमरे में ले जाया जाता है। इस कमरे में केवल अधिकृत अधिकारियों और अधिकृत बैंक कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति होती है। यहां पर हर दिन आने वाली नकद राशि को गिनने और उसका पूरा ब्योरा रजिस्टर में दर्ज करने की सख्त व्यवस्था लागू है।

    कहाँ दिखी गड़बड़ी और संदेह की वजह

    इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दान की गिनती के दौरान कुछ विसंगतियां पाई गई हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों के कुल चढ़ावे और बैंक में जमा हुई राशि के बीच के आंकड़ों में अंतर दिखाई दिया था। इसी अंतर को लेकर कुछ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया गया।

    गोपनीय कक्ष में नियमित जांच के दौरान अधिकारियों को पैसों के लेन-देन में कुछ विसंगतियां नजर आईं। इसके बाद यह बात बाहर आई कि मंदिर के चढ़ावे की गिनती में शामिल कुछ लोग चुपके से पैसों की हेराफेरी कर रहे थे। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से किसी निश्चित बड़ी रकम की चोरी की पुष्टि मंदिर प्रशासन ने नहीं की है।

    बैंक और सीसीटीवी कैमरों की भूमिका

    चढ़ावे की गिनती वाले गोपनीय कमरे में सुरक्षा के लिहाज से कई आधुनिक सीसीटीवी (CCTV) यानी बंद सर्किट टेलीविजन कैमरे लगाए गए हैं। इन्हीं खुफिया कैमरों की फुटेज को देखने के बाद जांचकर्ताओं को कुछ संदिग्ध गतिविधियों का पता चला था। फुटेज में कुछ लोग नकदी को गिनते समय उसे छिपाते हुए दिखाई दिए थे।

    इस मामले में संदेह के दायरे में आए चार कर्मचारियों को चिह्नित कर उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई है। इस जांच प्रक्रिया में दो स्थानीय बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर भी उंगली उठी है, क्योंकि वे भी गिनती के काम से सीधे जुड़े थे। जांच एजेंसियां अब इस बात की कड़ाई से पड़ताल कर रही हैं कि इस गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल था।

    ट्रस्ट ने आरोपों को सिरे से नकारा

    श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन सभी गंभीर आरोपों और अफवाहों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोई बड़ी गड़बड़ी या चोरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के दावों में कोई सच्चाई नहीं है।

    ट्रस्ट के अन्य न्यासियों ने भी बयान जारी कर कहा है कि मंदिर में पाई-पाई का लिखित हिसाब रखा जाता है। उन्होंने भक्तों को भरोसा दिलाया है कि रामलला के खजाने को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए कड़े इंतजाम मौजूद हैं। यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    ऑडिट प्रक्रिया और वित्तीय सुरक्षा तंत्र

    ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर के खातों का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट (Audit) यानी खातों की गहन वित्तीय जांच की जाती है। इस जांच प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के वरिष्ठ अधिकारी और ट्रस्ट के विशेषज्ञ सीधे तौर पर शामिल रहते हैं। यह वित्तीय जांच कई दिनों तक चलती है और इस बार भी यह रूटीन प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

    देश के अन्य बड़े मंदिरों की तर्ज पर ही यहां भी आधुनिक वित्तीय प्रणालियों का सहारा लिया जाता है। अब तक की जांच में किसी भी तरह की कोई बड़ी वित्तीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। ट्रस्ट ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही बिना सिर-पैर की बातों और अफवाहों पर ध्यान न दें।

    श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा का सवाल

    इस विवाद के सामने आने के बाद देश भर के श्रद्धालुओं में भी चिंता देखी जा रही है। राम मंदिर के निर्माण के लिए देश के करोड़ों लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई का अंशदान दिया है। ऐसे में चढ़ावे के पैसे में किसी भी तरह की लापरवाही या हेराफेरी की खबर भक्तों को मानसिक रूप से आहत करती है।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया जा रहा है। दान कक्ष की निगरानी के लिए अब नए नियम तय किए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके। मंदिर की पवित्रता और पारदर्शिता को बनाए रखना ही ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • जनता दर्शन में बुजुर्ग मां-बेटी की फरियाद सुन भावुक हुए सीएम योगी, बीटेक दाखिले का दिया आश्वासन

    जनता दर्शन में बुजुर्ग मां-बेटी की फरियाद सुन भावुक हुए सीएम योगी, बीटेक दाखिले का दिया आश्वासन

    गोरखपुर के जनता दर्शन में एक बुजुर्ग मां और बेटी की परेशानी सुनकर सीएम योगी आदित्यनाथ भावुक हो गए। उन्होंने होनहार बेटी को बीटेक में दाखिले का पूरा आश्वासन दिया।

    सीएम योगी का भावुक पल:

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर कानून व्यवस्था को लेकर अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन गोरखपुर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में उनका एक बेहद संवेदनशील और भावुक रूप देखने को मिला। अपनी परेशानी लेकर पहुंची एक बुजुर्ग मां और उनकी बेटी की फरियाद सुनकर मुख्यमंत्री का दिल पसीज गया।

    यह गरीब परिवार पैसों की भारी कमी के कारण बेटी की उच्च शिक्षा को लेकर काफी चिंतित था। मुख्यमंत्री ने उनकी पूरी बात बड़े ही धैर्य से सुनी और बेटी को इंजीनियरिंग की पढ़ाई (बीटेक) के लिए दाखिले का पक्का आश्वासन दिया। इस मानवीय घटना की पूरे प्रदेश में अब काफी चर्चा हो रही है।

    जनता दर्शन में पहुंची परेशान मां और बेटी

    गोरखनाथ मंदिर परिसर में सुबह के समय जनता दर्शन कार्यक्रम सुचारू रूप से चल रहा था। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सैकड़ों लोग अपनी निजी और सार्वजनिक समस्याएं लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचे थे। इसी भारी भीड़ के बीच एक बुजुर्ग महिला अपनी जवान बेटी के साथ वहां आई।

    महिला के चेहरे पर लाचारी और गहरी चिंता साफ झलक रही थी। जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोगों की पर्चियां लेते हुए उनके पास पहुंचे, तो महिला ने रोते हुए अपनी गंभीर आर्थिक मजबूरी बयान की। उन्होंने भरे गले से बताया कि उनकी बेटी पढ़ने में बहुत होशियार है और आगे बीटेक करना चाहती है।

    आर्थिक तंगी से टूट रहा था सपना

    बुजुर्ग मां ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके परिवार के पास इतने पैसे बिल्कुल नहीं हैं कि वे किसी भी अच्छे कॉलेज में बेटी का दाखिला करा सकें। पैसों की इस भारी कमी के कारण इस होनहार बेटी का इंजीनियर बनने का बड़ा सपना टूटता हुआ नजर आ रहा था।

    यह लाचारी सुनते ही वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारी भी शांत हो गए। बेटी ने भी नम आंखों से मुख्यमंत्री को अपनी पढ़ाई की लगन और पिछली कक्षाओं में आए अच्छे नंबरों के बारे में पूरी जानकारी दी। उसने प्रार्थना की कि अगर सरकार थोड़ी मदद कर दे, तो वह अपने परिवार का पूरा भविष्य सुधार सकती है।

    फरियाद सुनकर भावुक हुए सीएम योगी

    मां और बेटी की इस बेबसी और लाचारी को देखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंदर से काफी भावुक हो गए। उन्होंने तुरंत आगे बढ़कर बुजुर्ग महिला को ढांढस बंधाया और कहा कि उन्हें अब किसी भी बात की चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने बड़े ही स्नेह और अपनेपन के साथ उस बेटी से बात की और उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक हमारी सरकार काम कर रही है, किसी भी होनहार बच्चे की पढ़ाई पैसों की कमी के कारण रुकने नहीं दी जाएगी। यह आश्वासन सुनकर मां और बेटी दोनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

    बीटेक में दाखिले का मिला पक्का आश्वासन

    सीएम योगी ने मौके पर ही मौजूद अपने आला अधिकारियों को बेहद सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस मेधावी बेटी के बीटेक में दाखिले की पूरी प्रक्रिया बिना किसी देरी के जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जो भी आर्थिक मदद कॉलेज को चाहिए, वह सीधे सरकार की तरफ से दी जाएगी।

    अधिकारियों ने मुख्यमंत्री का आदेश मिलते ही तुरंत उस गरीब परिवार का पूरा विवरण और जरूरी शैक्षणिक दस्तावेज जमा कर लिए। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि कॉलेज में दाखिले के बाद भी इस बेटी को अपनी पूरी पढ़ाई के दौरान किसी तरह की आर्थिक या मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

    इस भावुक घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद पूरे प्रशासनिक अमले को एक कड़ा और साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा हासिल करना हर बच्चे का बुनियादी अधिकार है और इसे प्राप्त करने में गरीबी को कभी भी बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।

    उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और शिक्षा विभाग के अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों को हमेशा प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। अगर कोई गरीब और मेधावी छात्र उच्च शिक्षा के लिए सरकार से मदद मांगता है, तो सरकारी योजनाओं के तहत बिना किसी लालफीताशाही के उसे तुरंत लाभ पहुंचाया जाए।

    सरकार की शिक्षा समर्थक नीतियों का असर

    उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ सालों से लगातार गरीब और मेधावी छात्रों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं जमीन पर उतार रही है। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से लेकर कई अन्य छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के जरिए छात्रों को मुफ्त कोचिंग और आर्थिक मदद की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    गोरखपुर के जनता दर्शन में घटी यह ताजा घटना इन्हीं नीतियों का एक जीता-जागता और व्यावहारिक उदाहरण बन गई है। आम जनता के बीच इस बात की काफी तारीफ हो रही है कि सूबे के मुखिया खुद जमीन पर उतरकर एक-एक फरियादी की बात को इतनी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुन रहे हैं।

    गरीब परिवारों में जगी एक नई उम्मीद

    इस पूरी घटना के सामने आने के बाद प्रदेश के उन तमाम गरीब परिवारों में एक नई और मजबूत उम्मीद जगी है, जो अपने बच्चों को किसी बड़े संस्थान में ऊंची शिक्षा दिलाना चाहते हैं। उस बुजुर्ग मां और बेटी के चेहरे पर आई सुकून की मुस्कान ने राज्य के कई गरीब लोगों को हिम्मत दी है।

    जनता दर्शन में खड़े अन्य स्थानीय लोग और मंदिर में मौजूद आम फरियादी भी मुख्यमंत्री के इस दयालु स्वभाव को देखकर काफी प्रभावित हुए। सोशल मीडिया पर भी इस आत्मीय बातचीत के किस्से तेजी से साझा किए जा रहे हैं, जहां आम नागरिक मुख्यमंत्री की इस तत्काल मदद और दरियादिली की जमकर सराहना कर रहे हैं।

  • गाजीपुर एनकाउंटर पर तनावपूर्ण हुई यूपी की सियासत, योगी के मंत्री संजय निषाद ने दी राजनीतिक नुकसान की चेतावनी

    गाजीपुर एनकाउंटर पर तनावपूर्ण हुई यूपी की सियासत, योगी के मंत्री संजय निषाद ने दी राजनीतिक नुकसान की चेतावनी

    गाजीपुर एनकाउंटर के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक नुकसान की चेतावनी दी है।

    गाजीपुर एनकाउंटर पर तनावपूर्ण हुई यूपी की सियास

    उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए गाजीपुर एनकाउंटर ने राज्य की कानून व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी भारी हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ विपक्षी दल लगातार हमलावर हैं, तो वहीं अब सत्ता पक्ष के सहयोगी दल भी पुलिस की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने इस घटना पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक नुकसान का बड़ा कारण बताया है।

    मछुआरा समुदाय और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने अपनी ही गठबंधन सरकार की पुलिस कार्यप्रणाली पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि पुलिस और प्रशासन की यह मनमानी इसी तरह चलती रही, तो भविष्य में इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उनका यह बेबाक बयान भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़ा चेतावनी भरा संकेत माना जा रहा है।

    सहयोगी दल के कड़े रुख से गरमाई सियासत

    गाजीपुर में कमलेश बिंद के एनकाउंटर के बाद से सत्ताधारी गठबंधन के भीतर तनाव की स्थिति देखी जा रही है। संजय निषाद का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से समाज का एक बड़ा वर्ग सरकार से नाराज हो रहा है। उन्होंने मंच से खुले तौर पर कहा कि अगर समाज के लोग ही उनके साथ नहीं रहेंगे, तो फिर वह कैसी राजनीति करेंगे।

    मंत्री ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका दावा है कि जिस व्यक्ति का एनकाउंटर किया गया, वह विनीत राय हत्या के मामले में मुख्य आरोपी नहीं था। उन्होंने इसे अपने समाज के वोट बैंक को खराब करने और जनाधार को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

    पुलिस की कार्यप्रणाली पर मंत्री ने दागे सवाल

    एनकाउंटर की इस पूरी घटना को लेकर संजय निषाद ने गाजीपुर पुलिस की मंशा पर सीधा प्रहार किया है। उनका कहना है कि जब व्यक्ति के खिलाफ पहले से कोई बड़ा आपराधिक इतिहास या न्यायालय द्वारा दी गई सजा नहीं थी, तो सीधे गोली क्यों मारी गई। मंत्री ने पूछा कि क्या पुलिस को आत्मसमर्पण का उचित मौका नहीं देना चाहिए था।

    इस मामले में पुलिस के खुफिया विभाग (एलआईयू) की नाकामी का मुद्दा भी उठाया गया है। संजय निषाद ने सवाल किया कि जब इलाके में आक्रोश फैल रहा था और लोग विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे, तो पुलिस का खुफिया तंत्र क्या कर रहा था। समय रहते लोगों के गुस्से को शांत करने की कोशिश क्यों नहीं की गई।

    मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर दी चुनौती

    संजय निषाद ने अपने बयान में गाजीपुर पुलिस कप्तान को खुली चुनौती दे डाली है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस का यह गाजीपुर एनकाउंटर वास्तव में न्यायसंगत और निष्पक्ष है, तो पुलिस हत्याकांड के दोनों मुख्य आरोपियों का भी एनकाउंटर करके दिखाए। उनका सीधा आरोप है कि पुलिस केवल कमजोर लोगों को अपना निशाना बना रही है।

    मंत्री ने कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती, लेकिन चुन-चुन कर कार्रवाई करने से जनता में गलत संदेश जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली अपराधियों को पकड़ने के बजाय पुलिस ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई कर रही है जो केवल नाममात्र के सह-आरोपी बनाए गए थे।

    वोट बैंक और जनाधार खिसकने की उठी चिंता

    एनडीए गठबंधन के अहम सहयोगी होने के नाते संजय निषाद ने इस पूरी घटना को राजनीतिक चश्मे से भी देखा है। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के पुलिस एनकाउंटर से समाज में सरकार की छवि खराब होती है और वोटरों का टूटता है। निषाद पार्टी का मुख्य जनाधार इसी समुदाय से आता है।

    मंत्री ने चेतावनी दी है कि पुलिस की एकतरफा कार्रवाई सीधे तौर पर उनके राजनीतिक आधार को गहरी चोट पहुंचा रही है। स्थानीय लोगों में यह धारणा बन रही है कि पिछड़े और कमजोर वर्ग के लोगों को न्याय के नाम पर सताया जा रहा है। इसका सीधा असर आने वाले विधानसभा और स्थानीय चुनावों पर पड़ सकता है।

    मृतक की पत्नी के गंभीर आरोपों का किया जिक्र

    इस पूरे घटनाक्रम में मृतक की पत्नी के बयानों ने मामले को और भी ज्यादा पेचीदा बना दिया है। संजय निषाद ने मृतक कमलेश बिंद की पत्नी के उन गंभीर आरोपों का हवाला दिया जिसमें उसने कहा था कि पुलिस उसके पति को पहले पकड़कर थाने ले गई थी। पत्नी का दावा है कि उसके सामने ही थाने में पति की बुरी तरह पिटाई की गई थी।

    अगर पत्नी के ये आरोप सही हैं, तो यह एनकाउंटर की पुलिस थ्योरी पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। मंत्री ने कहा कि एक नागरिक होने के नाते मृतक के परिवार को भी न्याय मांगने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में पिटाई के बाद इस तरह एनकाउंटर में मार गिराने की बातें लोकतंत्र के लिए बेहद डरावनी हैं।

    विपक्ष को भी मिला सत्ता पक्ष को घेरने का मौका

    संजय निषाद की इस खुली बगावत से समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा राजनीतिक हथियार मिल गया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने भी इस एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए सरकार की कानून व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है।

    विपक्ष का आरोप है कि राज्य में कानून का राज पूरी तरह से खत्म हो चुका है और पुलिस केवल सत्ता के इशारे पर काम कर रही है। डिंपल यादव ने सवाल उठाया है कि जब पुलिस आरोपी को जिंदा पकड़ सकती थी, तो फिर एनकाउंटर करने की क्या आवश्यकता आ पड़ी। विपक्ष और सहयोगी दल के सुर एक होने से राज्य सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

    निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    जमीनी स्थितियों की गंभीरता को भांपते हुए संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने पूरे मामले की किसी सक्षम और उच्च स्तरीय एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराने की सख्त मांग रखी है। मंत्री चाहते हैं कि इस मामले का पूरा सच पारदर्शी तरीके से आम जनता के सामने आए।

    उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर स्थानीय लोगों के भारी गुस्से और समुदाय की आहत भावनाओं से भी उन्हें अवगत कराया है। संजय निषाद का स्पष्ट कहना है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।