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  • एशिया की सबसे लंबी जोजिला सुरंग का ऐतिहासिक ‘ब्रेकथ्रू’ ब्लास्ट संपन्न, कश्मीर-लद्दाख कनेक्टिविटी में बड़ा कदम

    एशिया की सबसे लंबी जोजिला सुरंग का ऐतिहासिक ‘ब्रेकथ्रू’ ब्लास्ट संपन्न, कश्मीर-लद्दाख कनेक्टिविटी में बड़ा कदम

    एशिया की सबसे लंबी जोजिला सुरंग का ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू ब्लास्ट आज संपन्न हुआ। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ब्लास्ट कर कश्मीर और लद्दाख के बीच बारहमासी संपर्क का रास्ता साफ किया।

    एशिया की सबसे लंबी जोजिला सुरंग का ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू ब्लास्ट आज संपन्न हुआ

    भारत के बुनियादी ढांचा विकास और सामरिक कनेक्टिविटी के लिहाज से आज एक ऐतिहासिक दिन है। एशिया की सबसे लंबी और ऊंचाई पर स्थित जोजिला सुरंग का महत्वपूर्ण ‘ब्रेकथ्रू’ ब्लास्ट सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस आखिरी ढाई मीटर के ब्लास्ट के साथ ही सुरंग के दोनों छोर आपस में जुड़ गए हैं। यह लगभग तेरह किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब (एकल नली) दो-तरफा सड़क सुरंग है, जो कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ेगी। इस अहम पड़ाव के बाद, दशकों पुराना वह सपना अब सच होने के बेहद करीब है, जिसमें भारी बर्फबारी के बावजूद लद्दाख देश के बाकी हिस्सों से पूरे साल जुड़ा रहेगा।

    ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू ब्लास्ट से जुड़ी सुरंग

    लद्दाख के मिनामार्ग में स्थित पूर्वी छोर पर आज यह बड़ा मुकाम हासिल किया गया। सुरंग की खुदाई का काम जोरों पर था और आखिरी हिस्से की चट्टान को एक नियंत्रित विस्फोट के जरिए तोड़ा गया। इस ब्लास्ट के साथ ही दोनों तरफ से हो रही खुदाई आपस में मिल गई, जिसे तकनीकी भाषा में ‘ब्रेकथ्रू’ कहा जाता है। यह पल न केवल इंजीनियरों और मजदूरों की कड़ी मेहनत का नतीजा है, बल्कि इस जटिल हिमालयी क्षेत्र में निर्माण की एक बड़ी उपलब्धि भी है।

    नितिन गडकरी ने किया रिमोट से ब्लास्ट

    केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस ऐतिहासिक पल की शुरुआत की। उन्होंने मिनामार्ग में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में रिमोट का बटन दबाकर सुरंग का अंतिम ब्लास्ट किया। इस खास अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह सुरंग आधुनिक इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना है और लद्दाख के लोगों की सर्दियों की मुश्किलें अब खत्म होने वाली हैं।

    लद्दाख और कश्मीर के बीच बारहमासी संपर्क

    जोजिला दर्रा हमेशा से ही खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों के महीनों में बंद रहता था। इस वजह से लद्दाख का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से करीब छह महीने तक पूरी तरह से कट जाता था। लेकिन समुद्र तल से लगभग ग्यारह हजार पांच सौ अठहत्तर फीट की ऊंचाई पर बन रही इस नई सुरंग के चालू होने के बाद, यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। अब श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूरे साल और हर मौसम में सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा।

    सफर के समय में होगी भारी बचत

    इस सुरंग के निर्माण से केवल मौसम की बाधा ही दूर नहीं होगी, बल्कि यात्रा के समय में भी भारी कमी आएगी। फिलहाल जोजिला दर्रे के खतरनाक और बर्फीले घुमावदार रास्तों को पार करने में लोगों को एक से तीन घंटे तक का समय लग जाता था। सुरंग शुरू होने के बाद यह दूरी सिर्फ पंद्रह से बीस मिनट के सुरक्षित सफर में सिमट जाएगी। यह आम नागरिकों, पर्यटकों और माल ढुलाई करने वाले वाहनों के लिए एक बहुत बड़ी और सुरक्षित सुविधा होगी।

    सेना और आम लोगों को मिलेगा बड़ा फायदा

    सामरिक दृष्टि से भी जोजिला सुरंग भारत के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव साबित होने वाली है। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से लगे लद्दाख क्षेत्र में भारतीय सेना को रसद, हथियार और सैनिकों की आवाजाही के लिए हमेशा खुला रास्ता चाहिए होता है। इस सुरंग के जरिए सशस्त्र बल अत्यधिक सर्दियों में भी तेजी से अपनी रणनीतिक पहुंच बना सकेंगे। इसके अलावा, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी इस बारहमासी रास्ते से जबरदस्त पंख लगेंगे, जिससे लद्दाख की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।

    आधुनिक तकनीक और निर्माण की चुनौतियां

    हिमालय के इस संवेदनशील और भूगर्भीय रूप से अस्थिर क्षेत्र में निर्माण करना आसान काम नहीं था। कार्यदायी संस्था मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड यानी एक विशेष सुरक्षित खुदाई तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक के कारण अस्थिर चट्टानों के ढहने और पानी के रिसाव जैसी जटिल चुनौतियों से निपटना संभव हो सका। कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे के तापमान के बावजूद हजारों इंजीनियरों और श्रमिकों ने यहां दिन-रात काम किया है।

    निवेश और रोजगार के नए अवसर

    इस विशाल राष्ट्रीय परियोजना को पूरा करने में करीब छह हजार आठ सौ करोड़ रुपये की भारी लागत आ रही है। इस सुरंग के निर्माण कार्य ने स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। स्थानीय नेताओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस ब्रेकथ्रू को एक ऐतिहासिक जीत बताया है। उनका मानना है कि बेहतर सड़कों और सुरंग के बन जाने से चिकित्सा और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी दूरदराज के इलाकों तक आसानी से पहुंच सकेंगी।

    परियोजना के बचे हुए काम और डेडलाइन

    अधिकारियों के अनुसार, सुरंग की खुदाई और ब्रेकथ्रू का काम तय समय से छह महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में परियोजना का लगभग पच्चासी प्रतिशत काम खत्म हो चुका है। अब अगले सात से आठ महीनों तक सुरंग के अंदर सड़क पक्की करने, कंक्रीट की परत चढ़ाने और हवा के वेंटिलेशन सिस्टम जैसे सिविल कार्य किए जाएंगे। इसके बाद इलेक्ट्रो-मैकेनिकल और बिजली का काम होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम को उम्मीद है कि फरवरी दो हजार अट्ठाइस तक यह सुरंग आम जनता के लिए पूरी तरह से खोल दी जाएगी।

  • पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान पीओके में ढेर, अज्ञात हमलावरों ने किया काम तमाम

    पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान पीओके में ढेर, अज्ञात हमलावरों ने किया काम तमाम

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके (PoK) से एक बहुत बड़ी और राहत देने वाली खबर आई है। साल 2019 में भारत के जम्मू-कश्मीर में हुए पुलवामा हमले का मुख्य साजिशकर्ता हमजा बुरहान मारा गया है। इस खूंखार आतंकी को मुजफ्फराबाद शहर में अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भून दिया। यह खबर पूरे भारत के लिए बहुत मायने रखती है।

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके (PoK) से एक बहुत बड़ी और राहत देने वाली खबर आई है। साल 2019 में भारत के जम्मू-कश्मीर में हुए पुलवामा हमले का मुख्य साजिशकर्ता हमजा बुरहान मारा गया है। इस खूंखार आतंकी को मुजफ्फराबाद शहर में अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भून दिया। यह खबर पूरे भारत के लिए बहुत मायने रखती है।

    आपको याद होगा कि पुलवामा हमले में हमारे 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हमजा बुरहान की मौत से उन वीर जवानों के परिवारों को थोड़ा सुकून जरूर मिलेगा। यह घटना एक बड़ा संदेश देती है कि भारत को खून के आंसू रुलाने वाले अब सीमा पार भी सुरक्षित नहीं हैं। पाकिस्तान की कड़ी सुरक्षा के बीच इस तरह की हत्या यह बताती है कि आतंकियों का अंत निश्चित है।

    यह पूरी घटना मुजफ्फराबाद के एक बेहद सुरक्षित इलाके में हुई है। स्थानीय लोगों और वहां की खुफिया जानकारी के मुताबिक, हमजा बुरहान तड़के सुबह की नमाज पढ़ने के लिए पास की एक मस्जिद में गया था। वह बेखौफ था और उसे किसी भी खतरे का अंदाजा नहीं था। नमाज खत्म करने के बाद जैसे ही वह मस्जिद से बाहर सड़क पर आया, उसका सामना मौत से हो गया।

    वहां पहले से ही घात लगाए मोटरसाइकिल सवार दो नकाबपोश हमलावर उसका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने पलक झपकते ही हमजा पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। हमलावर बहुत ही पेशेवर थे और उन्होंने आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि उनकी बंदूकों में साइलेंसर लगा हुआ था, ताकि किसी को भनक न लगे।

    हमजा बुरहान के सिर और छाती में कई गोलियां दागी गईं। वह संभल भी नहीं पाया और मौके पर ही ढेर हो गया। अपना काम पूरा करने के बाद दोनों हमलावर बड़ी ही आसानी से वहां से फरार हो गए। जब तक स्थानीय पुलिस वहां पहुंची, तब तक हमजा बुरहान की जान जा चुकी थी और हमलावर दूर निकल चुके थे।

    हमजा बुरहान भारत के सबसे बड़े और मोस्ट वांटेड दुश्मनों की लिस्ट में शामिल था। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हमारे जवानों के काफिले पर जो आत्मघाती हमला हुआ था, उसकी पूरी रूपरेखा इसी हमजा ने तैयार की थी। उसने ही विस्फोटकों का इंतजाम किया था।

    वह कश्मीर के भोले-भाले युवाओं के दिमाग में जहर घोलकर उन्हें आतंकी बनाने का काम करता था। इसके अलावा, पाकिस्तान से भारत में हथियार भेजने और आतंक फैलाने के लिए पैसे का जुगाड़ करने की जिम्मेदारी भी उसी की थी।

    इतने बड़े आतंकी की हत्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि यह आतंकी संगठनों के बीच पैसे और ताकत को लेकर आपसी रंजिश का नतीजा हो सकता है। वहीं, कुछ का यह भी कहना है कि जब आतंकी दुनिया की नजर में आ जाते हैं, तो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) खुद उन्हें रास्ते से हटा देती है ताकि वह दुनिया के सामने साफ-सुथरी बनी रहे।

    पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान और पीओके में एक बहुत ही अजीब सिलसिला चल रहा है। वहां छिपे बैठे भारत के कई बड़े दुश्मन एक-एक करके मारे जा रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि इन्हें मारने वाले हमेशा “अज्ञात हमलावर” ही होते हैं, जिनका कभी कोई सुराग नहीं मिलता।

    इससे पहले भी कई खूंखार आतंकी इसी तरह मारे गए हैं। इनमें परमजीत सिंह पंजवड़, रियाज अहमद और ख्वाजा शाहिद जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ये सभी अलग-अलग आतंकी संगठनों के बड़े कमांडर थे। पाकिस्तान हमेशा दुनिया के सामने छाती पीटकर कहता है कि उसके यहां कोई आतंकी नहीं छिपा है।

    लेकिन जब मुजफ्फराबाद और कराची जैसे शहरों के बीचों-बीच ये आतंकी मारे जाते हैं, तो पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब हो जाता है। यह घटनाएं साबित करती हैं कि पाकिस्तान आतंकियों के लिए कोई पनाहगाह नहीं बल्कि उनका कब्रिस्तान बनता जा रहा है

    इस खबर से आम भारतीयों के दिलों में एक बड़ा संतोष जगा है। देश का हर नागरिक पुलवामा हमले के दर्द को आज भी महसूस करता है। जब किसी आतंकी की वजह से हमारे जवान शहीद होते हैं, तो पूरे देश में एक भारी गुस्सा और बेबसी होती है। हमजा बुरहान के इस तरह मारे जाने से लोगों को यह भरोसा हुआ है कि न्याय जरूर होता है।

    खासकर उन 40 शहीदों के परिवारों के लिए यह खबर एक मरहम की तरह है। भले ही इसमें कुछ साल का वक्त लगा, लेकिन असली गुनहगार अपने अंजाम तक पहुंच गया। यह घटना देश के नागरिकों का मनोबल बढ़ाने वाली है।

    लोग अब यह बात मजबूती से महसूस कर रहे हैं कि हमारे देश की तरफ आंख उठाने वालों को अब चैन की नींद सोने नहीं दिया जाएगा। देश में राष्ट्रवाद और सुरक्षा को लेकर एक सकारात्मक भावना मजबूत हो रही है।

    इस हाई-प्रोफाइल हत्या के बाद पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना में भारी हड़कंप मचा हुआ है। मुजफ्फराबाद जैसे सैन्य इलाके में एक शीर्ष आतंकी का मारा जाना पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र की बहुत बड़ी नाकामी है। पाकिस्तानी पुलिस ने तुरंत पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है।

    खबर है कि हमजा बुरहान के शव को किसी गुप्त जगह पर ले जाया गया है। पाकिस्तान पूरी कोशिश करेगा कि इस खबर को दबा दिया जाए। वह कभी भी दुनिया के सामने यह नहीं मानेगा कि हमजा बुरहान उसके देश में मजे की जिंदगी जी रहा था।

    भारत सरकार या हमारी सेना आमतौर पर सीमा पार होने वाली ऐसी घटनाओं पर कोई सीधा आधिकारिक बयान नहीं देती है। लेकिन भारत अपनी सीमाओं पर चौकसी और बढ़ा देगा। आने वाले दिनों में पाकिस्तान में छुपे बैठे बाकी आतंकियों में खौफ और बढ़ेगा।

    कुल मिलाकर हमजा बुरहान का मारा जाना भारत के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है। पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड का ऐसा खौफनाक अंत यह बताता है कि आतंक का रास्ता सिर्फ और सिर्फ मौत की तरफ जाता है।

    भारत हमेशा से दुनिया भर में यह कहता आया है कि पाकिस्तान आतंकवादियों की फैक्ट्री है। अब इन अज्ञात हमलावरों ने पाकिस्तान के घर में घुसकर उन दावों की पोल खोल दी है। भारत के दुश्मन अब दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाएं, वे सुरक्षित नहीं रह सकते। यह खबर हर भारतीय को सुकून देने वाली और आतंकियों के मन में खौफ पैदा करने वाली है।