Author: देश वार्ताहर

  • “अतिक्रमण हटाने में Jet2 Holiday से भी ज़्यादा सुकून”: CM हिमंत के बुलडोजर वाले बयान ने मचाया तहलका

    “अतिक्रमण हटाने में Jet2 Holiday से भी ज़्यादा सुकून”: CM हिमंत के बुलडोजर वाले बयान ने मचाया तहलका

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक अनोखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमणकारियों से जमीन खाली करवाना उन्हें जेट2 हॉलिडे से भी ज़्यादा सुकून देता है। यह बयान राज्य में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियानों के प्रति उनके दृढ़ रुख को दर्शाता है।

    मुख्यमंत्री हिमंत का बेजोड़ बयान

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में अपने एक बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जमीन खाली करवाना उन्हें किसी जेट2 हॉलिडे से भी ज्यादा सुकून देता है। उनका यह बयान राज्य में अतिक्रमण विरोधी अभियानों के प्रति सरकार के कड़े रुख को एक बार फिर रेखांकित करता है।

    बुलडोजर कार्रवाई और ‘सुकून’ की तुलना

    गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा, “अतिक्रमणकारियों से दो एकड़ जमीन खाली करवाने में जो सुकून मिलता है, वह जेट2 हॉलिडे से भी अधिक है।” यह तुलना उनके मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और अवैध अतिक्रमणों से निपटने की प्राथमिकता को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार जनहित में इस तरह की कार्रवाई जारी रखेगी, भले ही इसका विरोध क्यों न हो। उनका यह बयान असम में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियानों की सफलता और उनसे मिलने वाले परिणामों पर उनके संतोष को प्रकट करता है।

    असम में अतिक्रमण विरोधी अभियान

    असम सरकार ने पिछले कुछ समय से राज्यभर में अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। वन भूमि, सरकारी संपत्तियों, ऐतिहासिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर हुए अतिक्रमणों को हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन अभियानों का उद्देश्य राज्य की भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करना है, जिन पर अक्सर अवैध बस्तियों या गतिविधियों का आरोप लगता रहा है। सरकार का मानना है कि ये अतिक्रमण राज्य के विकास और पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

    राज्य सरकार का दृढ़ संकल्प

    मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम सरकार ने अवैध गतिविधियों और अतिक्रमणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अपने इस रुख पर कायम है और विकास व सुशासन के लिए कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकेगी। यह टिप्पणी उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश भी है जो सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहने का संकेत देती है।

  • 2026 में भारत-पाकिस्तान युद्ध का खतरा: अमेरिकी थिंक टैंक की बड़ी चेतावनी, जानें क्या हैं संकेत

    2026 में भारत-पाकिस्तान युद्ध का खतरा: अमेरिकी थिंक टैंक की बड़ी चेतावनी, जानें क्या हैं संकेत

    एक अमेरिकी थिंक टैंक ने 2026 तक भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित सैन्य संघर्ष की ‘मध्यम’ संभावना जताई।

    एक प्रमुख अमेरिकी थिंक टैंक, काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR), ने 2026 तक भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष की “मध्यम” संभावना की चेतावनी दी है। यह चेतावनी चल रहे सीमा तनावों और आतंकवादी गतिविधियों पर चिंताओं के बीच आई है। यह आकलन CFR की ‘2026 में देखने योग्य संघर्ष’ रिपोर्ट का हिस्सा है।

    बढ़े हुए संघर्ष जोखिम के कारण

    • सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि: रिपोर्ट में आतंकवादी समूहों द्वारा बढ़ती गतिविधि को तनाव का प्राथमिक कारण बताया गया है, जिससे एक बड़े टकराव का जोखिम बढ़ रहा है। जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी समूहों द्वारा घुसपैठ और हमले भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय हैं।
    • मई 2025 में संक्षिप्त सैन्य टकराव: रिपोर्ट में मई 2025 में पहलगाम में एक आतंकवादी हमले के बाद एक संक्षिप्त सैन्य झड़प का उल्लेख है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल आदान-प्रदान हुआ। भारत ने जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। ऐसे छोटे टकराव बड़े संघर्षों से पहले हो सकते हैं।

    अमेरिकी हितों पर प्रभाव

    भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी संभावित संघर्ष का अमेरिकी हितों पर “मध्यम प्रभाव” पड़ने का अनुमान है। अमेरिका क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है, और एक बड़ा संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता को महत्वपूर्ण रूप से बदल देगा, जिससे अमेरिकी विदेश नीति और रणनीतिक हित प्रभावित होंगे। यह क्षेत्र अमेरिका, चीन और रूस जैसी बड़ी शक्तियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, और अस्थिरता वैश्विक व्यापार और निवेश को प्रभावित कर सकती है।

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव

    CFR रिपोर्ट में सीमा पार आतंकवादी हमलों में वृद्धि के कारण 2026 तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष की “मध्यम संभावना” भी इंगित की गई है। इस संघर्ष का अमेरिकी हितों पर “कम प्रभाव” होने का अनुमान है, लेकिन यह पूरे क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाता है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान और अन्य आतंकवादी समूहों की गतिविधियां पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करती हैं और भारत-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।

    रक्षा तैयारियों में तेजी

    • भारत की रक्षा तैयारियां: भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में लगभग ₹79,000 करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी दी, जिसमें उन्नत ड्रोन, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और गाइडेड बम शामिल हैं। यह हवाई शक्ति और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत देता है, जिससे भारत की मारक क्षमता और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
    • पाकिस्तान की रक्षा तैयारियां: पाकिस्तान अपनी हवाई रक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए तुर्की और चीन से नए ड्रोन और हवाई रक्षा प्रणालियों को प्राप्त करने पर विचार कर रहा है। चीन और तुर्की पाकिस्तान के लिए पारंपरिक रक्षा भागीदार हैं।

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान तनाव

    दशकों पुराने मुद्दे जैसे कश्मीर विवाद और सीमा पार आतंकवाद लगातार चुनौतियां रहे हैं। पिछले युद्धों में 1947, 1965, 1971 और 1999 का कारगिल युद्ध शामिल हैं। पुलवामा हमला और उसके बाद के बालाकोट हवाई हमले जैसी हाल की घटनाओं ने तनाव बढ़ा दिया। CFR रिपोर्ट इस ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान तनावों पर आधारित है।

    अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका

    संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ ने लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से मुद्दों को हल करने का आग्रह किया है। CFR की चेतावनी के बाद, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से स्थिति पर नजर रखने और शांतिपूर्ण समाधानों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है। हालांकि, बाहरी हस्तक्षेप की सीमाएं हैं, और अंतिम निर्णय दोनों राष्ट्रों के नेतृत्व पर निर्भर करते हैं।

    क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव

    भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी बड़े संघर्ष का पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में अशांति फैल सकती है। व्यापार मार्ग बाधित हो सकते हैं, आर्थिक विकास धीमा हो सकता है, और लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हो सकता है। यदि संघर्ष में परमाणु हथियार शामिल होते हैं तो परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

    शांति और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता

    CFR की चेतावनी को भारत और पाकिस्तान के लिए अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने के लिए एक आह्वान के रूप में देखा जाता है। सैन्य टकराव एक स्थायी समाधान नहीं है। लेख इस बात पर जोर देता है कि युद्ध केवल विनाश और पीड़ा लाता है। नेताओं से बातचीत करने, विश्वास-निर्माण उपायों को लागू करने और तनाव पैदा करने वाले मुद्दों को हल करने का आग्रह किया जाता है। खेल, संस्कृति और व्यापार के माध्यम से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से भी संबंधों में सुधार हो सकता है। शांति और कूटनीति को क्षेत्र की समृद्धि और स्थिरता का एकमात्र मार्ग बताया गया है।

    आगे का रास्ता

    अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट दोनों देशों के लिए अपनी नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने और भविष्य के लिए एक अधिक शांतिपूर्ण रणनीति विकसित करने के लिए एक “वेक-अप कॉल” के रूप में कार्य करती है। दोनों राष्ट्रों के पास सैन्य प्रतिद्वंद्विता में उलझने के बजाय विकास और अपने लोगों को ऊपर उठाने में अपनी ऊर्जा और संसाधनों का निवेश करने का अवसर है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। 2026 तक की अवधि को तनाव कम करने और स्थायी शांति की दिशा में कदम उठाने का अवसर बताया गया है।

  • साल 2025 खत्म होते-होते भारत ने रचा इतिहास: बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जापान को पछाड़ा

    साल 2025 खत्म होते-होते भारत ने रचा इतिहास: बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जापान को पछाड़ा

    देश के लिए एक और बड़ी खुशखबरी! साल 2025 के जाते-जाते भारत ने आर्थिक मोर्चे पर एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। अब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जिसने अपने आर्थिक प्रतिद्वंद्वी जापान को पीछे छोड़ दिया है। यह खबर पूरे देश के लिए गर्व का विषय है और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का साफ संकेत है। देशवासी इस उपलब्धि को नए साल के जश्न से पहले एक बड़े उपहार के तौर पर देख रहे हैं।

    भारत बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: जापान को पछाड़, आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा देश

    एक ऐतिहासिक उपलब्धि

     साल 2025 भारत के लिए आर्थिक मोर्चे पर एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व गति से विकास करते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने न केवल जापान को पीछे छोड़ा है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और क्षमता का भी प्रदर्शन किया है। यह खबर हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है और देश के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करती है। यह सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के अथक परिश्रम, सरकार की दूरदर्शी नीतियों और देश की मजबूत आंतरिक शक्ति का प्रमाण है।

    अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और भारत सरकार की नवीनतम आर्थिक समीक्षा रिपोर्टों के अनुसार, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है, जिसने जापान के सकल घरेलू उत्पाद को पीछे छोड़ दिया है। यह एक ऐसा क्षण है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। भारत, जो कभी एक विकासशील राष्ट्र के रूप में देखा जाता था, अब एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस सफलता के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता निवेश, और संरचनात्मक सुधार शामिल हैं।

    भारत की आर्थिक यात्रा:

    विकास की राह पर अग्रसर भारत की आर्थिक यात्रा पिछले कुछ दशकों में उल्लेखनीय रही है। उदारीकरण की शुरुआत से लेकर आज तक, देश ने आर्थिक विकास के कई चरणों को सफलतापूर्वक पार किया है। 1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नए द्वार खोले, जिससे विदेशी निवेश बढ़ा और घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिला। सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में भारत ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

    पिछले कुछ वर्षों में, भारत सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया है और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रौद्योगिकी को आम जन तक पहुंचाया है। इन प्रयासों ने न केवल आर्थिक गतिविधियों को तेज किया है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए हैं। विश्व बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे संस्थानों ने भी भारत की विकास दर के अनुमानों को लगातार ऊपर की ओर संशोधित किया है, जो देश की मजबूत आर्थिक नींव को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, RBI ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है, जो असाधारण रूप से मजबूत वृद्धि का संकेत है।

    भारत की यह तीव्र आर्थिक वृद्धि दर उसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाती है। यह गति ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति और व्यापारिक बाधाएं शामिल हैं। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, भारत ने अपनी आंतरिक शक्ति और लचीलेपन का प्रदर्शन किया है।

    विकास के प्रमुख स्तंभ: किन कारकों ने दी गति?

    भारत की इस ऐतिहासिक आर्थिक छलांग के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक हैं। इन्हें समझना यह जानने के लिए महत्वपूर्ण है कि देश ने इतनी तेजी से यह मुकाम कैसे हासिल किया।

    • मजबूत घरेलू मांग और उपभोग: भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, और यहां की मजबूत घरेलू मांग अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बढ़ती आय, शहरीकरण और बदलते उपभोक्ता व्यवहार ने वस्तुओं और सेवाओं की मांग में लगातार वृद्धि की है। विशेष रूप से, निजी उपभोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख चालक है।
    • बढ़ता निवेश और बुनियादी ढांचा विकास: सरकार ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और डिजिटल कनेक्टिविटी पर भारी निवेश किया है। इन निवेशों ने न केवल रोजगार सृजित किए हैं बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है, जिससे व्यवसायों के लिए एक अनुकूल माहौल बना है। निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ रहा है, जो भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
    • संरचनात्मक सुधार और नीतिगत स्थिरता: पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने कई साहसिक संरचनात्मक सुधार किए हैं। वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधार, दिवालियापन संहिता (IBC), और श्रम कानूनों में सुधार ने व्यापार करने में आसानी को बढ़ाया है और निवेश को आकर्षित किया है। इन सुधारों ने अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया है।
    • डिजिटल क्रांति और वित्तीय समावेशन: ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान ने देश में एक डिजिटल क्रांति ला दी है। UPI जैसे डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने लेनदेन को आसान और तेज बनाया है। जन धन योजना जैसी पहलों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं।
    • निर्यात प्रदर्शन में सुधार: वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत ने अपने निर्यात प्रदर्शन में सुधार किया है। विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ी है, और सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ और निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं इसमें सहायक रही हैं।
    • नियंत्रित मुद्रास्फीति और अनुकूल मौद्रिक नीति: भारतीय रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक स्थिर मौद्रिक नीति ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है और दीर्घकालिक विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया है।

    जापान को पीछे छोड़ने के मायने

    भारत द्वारा जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक प्रतीकात्मक और वास्तविक दोनों तरह की उपलब्धि है। जापान, जो दशकों से एक आर्थिक दिग्गज रहा है, अब धीमी गति से बढ़ रहा है और कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

    • जनसांख्यिकीय चुनौतियां: जापान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उसकी तेजी से बूढ़ी होती आबादी और घटती जन्म दर है। इससे कार्यबल में कमी आई है और सामाजिक सुरक्षा लागतों पर दबाव बढ़ा है, जिससे आर्थिक विकास की गति धीमी हुई है।
    • धीमी आर्थिक वृद्धि: जापान की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ रही है। 2025 और 2026 के लिए इसकी आर्थिक वृद्धि दर लगभग 0.6% रहने का अनुमान है, जो भारत की 6% से अधिक की वृद्धि दर से काफी कम है। वैश्विक व्यापार में मंदी का भी जापान के निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
    • मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति: जापान दशकों तक अपस्फीति (deflation) से जूझता रहा है, और अब वह मुद्रास्फीति की एक मध्यम अवधि की ओर बढ़ रहा है। बैंक ऑफ जापान अपनी दशकों पुरानी अति-शिथिल मौद्रिक नीति को सामान्य करने की प्रक्रिया में है, जिसने ब्याज दरों में वृद्धि की है। इन परिवर्तनों का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
    • प्रति व्यक्ति आय का अंतर: हालांकि भारत ने कुल जीडीपी में जापान को पीछे छोड़ दिया है, प्रति व्यक्ति आय में अभी भी एक बड़ा अंतर है। 2025 में, भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग $2,934 अनुमानित है, जबकि जापान की $33,955 है। यह दर्शाता है कि भारत को अपनी जनसंख्या के बड़े हिस्से की जीवनशैली में सुधार के लिए अभी भी लंबा रास्ता तय करना है।

    भारत की युवा और बढ़ती आबादी, मजबूत घरेलू बाजार और नवाचार की तीव्र गति उसे दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत स्थिति में रखती है, जबकि जापान को अपनी संरचनात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

    भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां: अगला लक्ष्य – तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

    भारत की यह उपलब्धि केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। देश का अगला बड़ा लक्ष्य अगले ढाई से तीन वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है। अनुमान है कि 2030 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो इसे एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य मजबूत नीतिगत ढांचे, निरंतर निवेश और नवाचार पर केंद्रित प्रयासों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

    हालांकि, इस यात्रा में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दे भारत के विकास पथ को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, असमानता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार, और स्थायी रोजगार सृजन जैसी आंतरिक चुनौतियों से निपटना भी महत्वपूर्ण होगा। सरकार और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी, नवाचार को प्रोत्साहन, और मानव पूंजी में निवेश भारत को इन चुनौतियों का सामना करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।

    आम आदमी पर प्रभाव: विकास के लाभ

    यह आर्थिक उछाल केवल बड़े आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम भारतीय के जीवन पर भी पड़ता है।

    • रोजगार के अवसर: मजबूत आर्थिक वृद्धि से नए उद्योगों का विकास होता है और मौजूदा उद्योगों का विस्तार होता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। यह विशेष रूप से युवा आबादी के लिए महत्वपूर्ण है।
    • बेहतर जीवन स्तर: बढ़ती अर्थव्यवस्था का अर्थ है लोगों की आय में वृद्धि। उच्च आय बेहतर जीवन स्तर, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आवास तक पहुंच प्रदान करती है।
    • बुनियादी ढांचे में सुधार: सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे निवेश से आम नागरिक को सीधे लाभ मिलता है। बेहतर सड़कें, सार्वजनिक परिवहन, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी से जीवन आसान होता है और व्यापार को बढ़ावा मिलता है।
    • सामाजिक कल्याण योजनाएं: बढ़ती अर्थव्यवस्था सरकार को सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों जैसे गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य बीमा और शिक्षा सहायता पर अधिक खर्च करने में सक्षम बनाती है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को लाभ होता है।
    • वैश्विक प्रतिष्ठा: एक मजबूत अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को बढ़ाती है। यह विदेशी निवेश को आकर्षित करता है और भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर पैदा करता है।

    संक्षेप में, भारत का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना देश के लिए एक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि दशकों के अथक प्रयासों और दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है। आगे की राह चुनौतियों से भरी हो सकती है, लेकिन जिस गति और दृढ़ संकल्प के साथ भारत आगे बढ़ रहा है, वह निश्चित रूप से इसे एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जाएगा। यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण है और देश की असीमित क्षमता का प्रमाण है।

  • उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का कहर: दिल्ली-NCR से बिहार तक जनजीवन प्रभावित, हाई अलर्ट जारी

    उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का कहर: दिल्ली-NCR से बिहार तक जनजीवन प्रभावित, हाई अलर्ट जारी

    उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर बिहार तक, कई राज्यों में इस मौसम का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया है। भीषण शीतलहर, गिरते तापमान और शून्य दृश्यता के कारण लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए हैं।

    पूरे उत्तर भारत में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे गिर गया है। दिल्ली में पारा 6.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि हरियाणा के हिसार में तो यह सिर्फ 2.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ों पर बर्फबारी हुई, जिसका असर मैदानी इलाकों में गलन भरी ठंड के रूप में दिख रहा है।

    सुबह के समय घना कोहरा इतना गहरा था कि कुछ जगहों पर दृश्यता लगभग खत्म हो गई थी। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रविवार सुबह दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। सड़कों पर लाइटें जलाकर धीरे-धीरे गाड़ियां चलानी पड़ीं।

    कड़ाके की ठंड का असर दिहाड़ी मजदूरों और सड़क किनारे काम करने वाले छोटे दुकानदारों पर भी पड़ा है। सुबह काम पर निकलने वाले लोगों की संख्या कम रही, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है। बाजार भी देर से खुले और जल्दी बंद हो गए, जिसका व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव दिखा।

    यातायात पर गहरा असर

    घने कोहरे के कारण यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। दिल्ली-एनसीआर और आसपास के एक्सप्रेसवे पर सुबह के समय गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

    उड़ानें रद्द, ट्रेनें लेट

    हवाई यातायात पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कोहरे के कारण 128 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और 300 से ज़्यादा उड़ानें देरी से चल रही हैं। इससे हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। रेलवे ने भी 90 से अधिक ट्रेनों के लेट होने की जानकारी दी है, जिससे यात्री घंटों स्टेशन पर फंसे रहे।

    एयरलाइंस की सलाह

    प्रमुख एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया और इंडिगो ने यात्रियों के लिए यात्रा सलाह जारी की है। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी पहले ही ले लें और हवाई अड्डे पर समय से काफी पहले पहुंचें। इससे अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सकेगा। एयरपोर्ट पर अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया है ताकि यात्रियों को हर संभव मदद मिल सके।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई अलर्ट जारी किए हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में ‘गंभीर कोल्ड डे’ की स्थिति के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। इसका मतलब है कि यहां दिन का तापमान भी सामान्य से काफी कम रहेगा और ठंड बहुत ज्यादा होगी, जिससे लोगों को दिनभर घर में रहने की सलाह दी जाती है।

    पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में शीतलहर और घने कोहरे के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ है। यह बताता है कि इन क्षेत्रों में भी ठंड और कोहरे की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वहीं, दिल्ली में घने कोहरे के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है, जहां लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    ठंड से बचाव के उपाय और सरकारी कदम

    ठंड से बचने के लिए लोगों को गर्म कपड़े पहनने, घर में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को खास ख्याल रखने के लिए कहा गया है। डॉक्टरों ने हीटर या ब्लोअर का इस्तेमाल करते समय उचित वेंटिलेशन बनाए रखने की सलाह दी है, ताकि कार्बन मोनोऑक्साइड poisoning का खतरा न हो।

    भीषण ठंड के कारण उत्तर प्रदेश में कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूलों को 1 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है। बच्चों को ठंड से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है। कई शहरों में नगर निगम ने रात में बेघर लोगों के लिए अस्थायी आश्रय और अलाव की व्यवस्था की है। किसानों को भी अपनी फसलों और पशुओं को ठंड से बचाने के लिए विशेष उपाय करने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली-एनसीआर में ठंड के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन गया है, जहां हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी (400 से ऊपर) में बनी हुई है। कोहरे के साथ प्रदूषण के कण मिलकर स्मॉग का रूप ले लेते हैं, जिससे सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने फेफड़ों के मरीजों और बच्चों को घर के अंदर रहने की सलाह दी है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि नए साल तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में घना कोहरा और शीतलहर बनी रहेगी। एक नया पश्चिमी विक्षोभ 30 दिसंबर से 2 जनवरी के बीच पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी ला सकता है। इसके असर से पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़ और पश्चिमी राजस्थान में भी हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

    हालांकि, इस बारिश के बाद हवाओं की दिशा बदलेगी और उत्तर भारत में और भी ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे कड़ाके की शीतलहर का एक और दौर शुरू होने की आशंका है। इसके साथ घना कोहरा भी छाएगा। लोगों को अगले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। ऐसे में सभी को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।

  • पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण, भारतीय सेना में शामिल करने की मिली मंजूरी

    पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण, भारतीय सेना में शामिल करने की मिली मंजूरी

    भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूती देते हुए, पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का पहला उड़ान परीक्षण सोमवार, 29 दिसंबर, 2025 को सफलतापूर्वक पूरा हो गया। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) में किया गया। इस दौरान रॉकेट ने अपने 120 किलोमीटर के पूरे लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा। इस सफलता को ‘टेक्स्टबुक प्रिसिजन’ यानी एकदम सही बताया गया है।

    यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम के लिए एक बड़ा कदम है। परीक्षण के साथ ही, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट को भारतीय सेना में शामिल करने की मंजूरी भी दे दी। यह दिखाता है कि सरकार इस प्रणाली को कितनी जल्दी सेना का हिस्सा बनाना चाहती है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कामयाबी पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह रॉकेट सशस्त्र बलों की क्षमताओं को बहुत बढ़ाएगा और एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा। यह रॉकेट मौजूदा पिनाका लॉन्चर से ही दागा गया था। इससे इसकी बहुमुखी प्रतिभा साबित होती है। इसका मतलब है कि एक ही लॉन्चर से अलग-अलग रेंज के रॉकेट दागे जा सकते हैं।

    भारतीय सेना की मजबूत होती क्षमता

    भारतीय सेना अपनी लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी क्षमता को और मजबूत करने के लिए 120 किलोमीटर रेंज के इन पिनाका रॉकेटों को हासिल करने का प्रस्ताव पहले ही दे चुकी थी। रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) की मंजूरी के बाद, अब इन रॉकेटों को तेजी से सेना के आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल किया जाएगा। ये रेजिमेंट पहले से ही पिनाका प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह कदम सेना को दुश्मनों पर दूर से ही सटीक हमला करने की ताकत देगा, जिससे उसकी ऑपरेशनल तैयारियां मजबूत होंगी।

    पिनाका LRGR-120: सटीकता और मारक क्षमता

    पिनाका LRGR-120, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (MBRLS) का एक उन्नत रूप है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका इंटीग्रेटेड गाइडेड सिस्टम है, जिससे यह बहुत सटीक निशाना लगा सकता है। इसकी सटीकता इतनी ज्यादा है कि इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) 20 मीटर से भी कम है। आसान भाषा में कहें तो यह अपने लक्ष्य के 20 मीटर के दायरे में ही गिरेगा, जिससे दुश्मन को कम से कम गलती की गुंजाइश मिलती है और आसपास के नुकसान की संभावना कम हो जाती है।

    यह रॉकेट पहले से इस्तेमाल हो रहे पिनाका लॉन्चर से ही दागा गया, जिससे इसकी अनुकूलता का पता चलता है। मौजूदा पिनाका सिस्टम 40 किमी और 75 किमी की रेंज वाले रॉकेट दागते हैं। लेकिन LRGR-120 इस क्षमता को 120 किमी तक ले जाता है। आमतौर पर, एक पिनाका लॉन्चर से 12 बिना-गाइडेड रॉकेट या 8 गाइडेड रॉकेट दागे जा सकते हैं। यह प्रणाली सेना को युद्ध के मैदान में अधिक लचीलापन प्रदान करती है।

    भारत के लिए रणनीतिक महत्व और आत्मनिर्भरता

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट भारत की तोपखाने की ताकत के लिए ‘गेम-चेंजर’ है। यह भारतीय सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल क्षमता और दूर से सटीक हमला करने की क्षमता को काफी बढ़ाएगा। यह प्रणाली भारतीय सेना को दुश्मन के इलाकों में गए बिना, सुरक्षित दूरी से हमला करने का विकल्प देती है। इससे लॉन्च यूनिट्स की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

    खासकर ऊंचे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में यह प्रणाली एक बड़ा फायदा देगी। ऐसे इलाकों में सटीक निशाना लगाना बेहद जरूरी होता है। इसका हल्का प्लेटफॉर्म (22-25 टन) भारत के उबड़-खाबड़ सीमावर्ती इलाकों के लिए अधिक मुफीद है।

    यह चीन के भारी सिस्टमों के मुकाबले बेहतर साबित होगा, भले ही उनकी रेंज समान हो। उन्नत पिनाका वैरिएंट्स को सेना में तेजी से शामिल करने से भारत की सटीक हमला करने और दुश्मन को रोकने की क्षमता और भी मजबूत होगी। यह किसी भी क्षेत्रीय चुनौती का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण है।

    डीआरडीओ की महत्वपूर्ण भूमिका और भविष्य की राह

    पिनाका LRGR-120 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) ने डिजाइन किया है। इसमें हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) ने सहयोग दिया है। साथ ही, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) और रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह पूरी तरह से स्वदेशी विकास है।

    आने वाले समय में, इन उन्नत रॉकेटों के सेना में शामिल होने से भारत की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सैन्य संतुलन और मजबूत होगा। यह न केवल हमारी सेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि दुश्मनों को भी किसी दुस्साहस से पहले दो बार सोचने पर मजबूर करेगा। पिनाका LRGR-120 भारत की आत्मनिर्भरता और सैन्य आधुनिकीकरण के संकल्प को दर्शाता है।