पीओके पर ब्रिटेन की फटकार से बौखलाया पाकिस्तान

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके पर ब्रिटेन की सख्त टिप्पणी से पाकिस्तान तिलमिला गया है

पीओके पर ब्रिटेन की फटकार से बौखलाया पाकिस्तान, कहा- यह हमारा घरेलू मसला है

ब्रिटेन से मिली बड़ी फटकार

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके (PoK – पर्सनली ऑक्यूपाइड कश्मीर) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन सरकार की तरफ से आई एक तीखी प्रतिक्रिया ने पाकिस्तान को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। इस मामले में ब्रिटिश हुकूमत ने पाकिस्तान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है।

ब्रिटेन से मिली इस बड़ी फटकार के बाद पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है। उसने तुरंत एक आधिकारिक बयान जारी कर ब्रिटिश सरकार के रुख पर गहरी आपत्ति जताई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बाहरी देशों को उसके अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी करने की कोई जरूरत नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर नया विवाद

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ब्रिटेन की संसद में पीओके के भीतर मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में वहां रहने वाले आम नागरिकों की बदहाली और उन पर हो रहे जुल्मों का विस्तार से जिक्र किया गया था। ब्रिटिश सांसदों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।

ब्रिटिश सरकार के मंत्रियों ने भी इस रिपोर्ट का समर्थन करते हुए पाकिस्तान प्रशासन को अपनी नीतियां सुधारने की नसीहत दे डाली। ब्रिटेन ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में नागरिकों के बुनियादी हक नहीं छीने जाने चाहिए। इसी बात ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कटघरे में खड़ा कर दिया।

पाकिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति

ब्रिटेन की इस टिप्पणी से तिलमिलाए पाकिस्तान ने आनन-फानन में अपने वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक बुलाई। बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि पीओके पर ब्रिटेन की फटकार पूरी तरह से अनुचित है। पाकिस्तान इसे अपना एक घरेलू मसला मानता है और किसी भी तीसरे देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा।

इस्लामाबाद में मौजूद राजनयिकों ने ब्रिटिश उच्चायुक्त को तलब करके अपनी नाराजगी दर्ज कराई है। पाकिस्तान का कहना है कि इस तरह के बयानों से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ सकता है। वह इस मुद्दे को लेकर वैश्विक स्तर पर अपना बचाव करने में जुट गया है।

क्षेत्र में लंबे समय से तनाव

पीओके के भीतर पिछले काफी समय से स्थानीय लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां आटे, बिजली और अन्य जरूरी चीजों की भारी किल्लत बनी हुई है। जनता सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की मांग कर रही है, जिसे पाकिस्तानी सेना बलपूर्वक दबाने की कोशिश में जुटी है।

स्थानीय संगठनों ने कई बार अंतरराष्ट्रीय समुदायों से मदद की गुहार लगाई है। ब्रिटेन की संसद में उठा यह मुद्दा इसी जमीनी हकीकत से जुड़ा हुआ है। पाकिस्तान इस बात से डरा हुआ है कि अगर यह मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचा, तो उसकी स्थिति और कमजोर हो जाएगी।

ब्रिटिश सांसदों की तीखी रिपोर्ट

ब्रिटेन के जिन सांसदों ने इस मुद्दे को उठाया था, उनका कहना है कि वे चुप नहीं बैठेंगे। रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि पीओके में बोलने की आजादी पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वहां के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल केवल पाकिस्तान सरकार अपने फायदे के लिए कर रही है।

ब्रिटिश सांसदों ने मांग की है कि एक स्वतंत्र जांच दल को वहां का दौरा करने की इजाजत दी जानी चाहिए। इस मांग ने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है। वह किसी भी कीमत पर बाहरी दुनिया को वहां की असलियत देखने की इजाजत नहीं देना चाहता।

भारत के रुख पर नजरें

इस पूरे वैश्विक घटनाक्रम के बीच भारत की रणनीतिक नजरें भी इस विवाद पर टिकी हुई हैं। भारत हमेशा से यह कहता आया है कि पूरा कश्मीर उसका अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान ने गैरकानूनी तरीके से पीओके पर अपना कब्जा जमा रखा है, जिसे उसे खाली करना ही होगा।

ब्रिटेन की इस नई टिप्पणी से भारत के रुख को वैश्विक मंच पर और मजबूती मिली है। भारतीय विदेश मंत्रालय के जानकार इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। हालांकि भारत ने अभी तक इस ताजा विवाद पर कोई आधिकारिक और बड़ा बयान जारी नहीं किया है।

वैश्विक समीकरणों में बदलाव के संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन का यह कड़ा रुख वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। अब तक पश्चिमी देश इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी बोलने से बचते रहे हैं। लेकिन अब मानवाधिकारों के नाम पर पाकिस्तान की घेराबंदी शुरू हो चुकी है।

इस विवाद का असर पाकिस्तान को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद पर भी पड़ सकता है। पहले से ही कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अब इस बात से डरा हुआ है कि अगर अन्य यूरोपीय देशों ने भी ब्रिटेन जैसा रुख अपना लिया, तो वह पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएगा।

भविष्य की राह हुई मुश्किल

आने वाले दिनों में यह विवाद थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं। पाकिस्तान भले ही इसे अपना घरेलू मसला बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन दुनिया अब उसकी दलीलों को मानने के लिए तैयार नहीं है। ब्रिटिश सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर नजर बनाए रखेगी।

अब देखना होगा कि पाकिस्तान सरकार इस अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कैसे करती है। क्या वह वहां के लोगों को उनके हक देगी या फिर अपनी पुरानी दमनकारी नीतियों पर ही टिकी रहेगी। इस पूरे मामले ने दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया सस्पेंस पैदा कर दिया है।

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