ऐप्पल ने भारतीय यूजर्स के लिए ऐप्पल वॉच में नया स्लीप एपनिया अलर्ट फीचर शुरू कर दिया है। जानिए यह फीचर कैसे काम करता है और नींद की बीमारी का कैसे पता लगाता है।
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद से जुड़ी बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मोबाइल और गैजेट बनाने वाली मशहूर कंपनी ऐप्पल ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने भारतीय यूजर्स के लिए अपनी स्मार्टवॉच में एक नया और जीवन रक्षक हेल्थ फीचर शुरू कर दिया है। इस फीचर का नाम ‘स्लीप एपनिया अलर्ट’ है। यह उन लोगों के लिए बहुत जरूरी खबर है जो स्मार्टवॉच पहनकर सोते हैं और अपनी सेहत को लेकर काफी सतर्क रहते हैं। यह नई तकनीक सोते समय होने वाली गंभीर समस्याओं को समय रहते पहचानने में बहुत बड़ी मदद करेगी।
ऐप्पल ने भारत में अपनी स्मार्टवॉच इस्तेमाल करने वालों के लिए एक नया ‘स्लीप एपनिया नोटिफिकेशन’ फीचर चालू कर दिया है। स्लीप एपनिया नींद से जुड़ी एक बहुत ही गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में इंसान जब गहरी नींद में सो रहा होता है, तो उसकी सांस कुछ सेकंड के लिए अचानक रुक जाती है और फिर एक झटके के साथ वापस आती है।
सांस रुकने की वजह से शरीर और दिमाग तक पूरी ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। अगर इस बीमारी का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह आगे चलकर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि दुनिया भर में करोड़ों लोग इस बीमारी के शिकार हैं, लेकिन उन्हें कभी इसका पता ही नहीं चल पाता क्योंकि यह सब सोते समय होता है।
ऐप्पल वॉच इस बीमारी का पता लगाने के लिए एक खास तकनीक का इस्तेमाल करती है। कंपनी ने वॉच में ‘ब्रीदिंग डिस्टर्बेंस’ यानी सांस में रुकावट नापने वाला एक नया सिस्टम डाला है।
इस स्मार्टवॉच में एक बेहद संवेदनशील सेंसर लगा होता है जिसे एक्सेलेरोमीटर कहते हैं। जब आप वॉच पहनकर सोते हैं, तो यह सेंसर आपकी कलाई की बहुत हल्की हरकतों को भी बारीकी से दर्ज करता है। जब किसी व्यक्ति की सांस रुकती है, तो उसके शरीर की गति में थोड़ा बदलाव आता है। वॉच की यह तकनीक इसी बदलाव को तुरंत पहचान लेती है। यह पूरा सिस्टम बहुत ही आधुनिक कंप्यूटर तकनीक और मेडिकल मशीन लर्निंग के डेटा के आधार पर तैयार किया गया है।
स्मार्टवॉच से सेहत की निगरानी करना अब कोई नई बात नहीं है। ऐप्पल पहले भी अपनी घड़ियों में हार्ट रेट और ऑक्सीजन नापने जैसे फीचर दे चुका है। लेकिन यह नया फीचर रातों-रात कोई नतीजा नहीं देता है। यह बहुत गहराई से काम करता है।
अलर्ट देने के लिए वॉच आपके सोने के तरीके को पूरे तीस दिन तक समझती है। इस फीचर के सही से काम करने के लिए यह बहुत जरूरी है कि आप तीस दिन के अंदर कम से कम दस रातों तक अपनी घड़ी पहनकर सोएं। अगर इन तीस दिनों की निगरानी में घड़ी को यह लगता है कि आपकी सांस बार-बार रुक रही है और यह समस्या गंभीर स्तर पर है, तो वह आपके मोबाइल के हेल्थ ऐप पर तुरंत एक अलर्ट भेज देगी।
इस नए फीचर का सबसे बड़ा फायदा उन आम उपभोक्ताओं को होगा जो अपनी सेहत को बेहतर बनाना चाहते हैं। ऐप्पल ने साफ किया है कि यह वॉच कोई मेडिकल डिवाइस नहीं है जो बीमारी का पक्का इलाज बता सके। यह केवल एक शुरुआती चेतावनी देने वाली मशीन की तरह काम करती है।
अलर्ट मिलने के बाद उपभोक्ता अपने हेल्थ ऐप से पिछले एक महीने या छह महीने के सांस के डेटा की एक पूरी पीडीएफ रिपोर्ट (PDF Report) डाउनलोड कर सकते हैं। इस रिपोर्ट को वे अपने डॉक्टर को दिखा सकते हैं। इसके बाद डॉक्टर असली मेडिकल टेस्ट करके बीमारी का सही इलाज शुरू कर सकते हैं। यह फीचर अठारह साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए है, जिन्हें पहले से यह बीमारी नहीं है।
आने वाले दिनों में यह फीचर धीरे-धीरे सभी योग्य ऐप्पल वॉच यूजर्स तक पहुंच जाएगा। फिलहाल यह सुविधा ऐप्पल वॉच सीरीज 9 और उसके बाद के नए मॉडल्स पर ही काम करेगी। इसके अलावा यह ‘ऐप्पल वॉच अल्ट्रा 2’ और ‘ऐप्पल वॉच एसई 3’ में भी उपलब्ध होगी।
यूजर्स को इस फीचर का फायदा उठाने के लिए सबसे पहले अपने आईफोन और स्मार्टवॉच के सॉफ्टवेयर को अपडेट करना होगा। फोन अपडेट होने के बाद, यूजर्स अपने मोबाइल के हेल्थ ऐप में जाकर इस फीचर को खुद चालू कर सकते हैं। वहां एक खास सेक्शन बना है जहां से इस सुविधा को शुरू किया जा सकता है। उम्मीद है कि कंपनी भविष्य में इस तकनीक को और भी ज्यादा सटीक बनाने के लिए नए बदलाव करेगी।
ऐप्पल वॉच का यह नया स्लीप एपनिया फीचर सेहत की दुनिया में एक बहुत ही शानदार कदम है। यह तकनीक उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो बिना जाने इस खतरनाक बीमारी का शिकार हैं।
स्मार्ट गैजेट्स अब केवल समय देखने या मैसेज पढ़ने तक सीमित नहीं रह गए हैं। वे अब हमारी जिंदगी बचाने वाले एक अहम साथी बन चुके हैं। अगर आप भी ऐप्पल वॉच का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको तुरंत इस फीचर को चालू कर लेना चाहिए। अपनी सेहत की निगरानी खुद करना एक अच्छी आदत है, और आज की तकनीक इसे बहुत आसान बना रही है।

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