इमरान खान की बहन अलीमा खान गिरफ्तार: पाकिस्तान में सियासी हलचल तेज

पाकिस्तान में यह सियासी बवाल कब थमेगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इमरान खान और उनके परिवार के खिलाफ हो रही कार्रवाइयां देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रही हैं।

पाकिस्तान में सियासी संकट गहरा रहा है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ रही हैं और उनके परिवार पर भी कानूनी कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है। इमरान खान की बहन अलीमा खान को एक बार फिर पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह घटना तब हुई जब अलीमा खान अपनी बहनों के साथ रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद इमरान खान से मिलने का प्रयास कर रही थीं। पुलिस ने उन्हें और अन्य प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया और कुछ समय के लिए हिरासत में लिया। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान गहरे राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है, और इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को सरकार सख्ती से दबाने की कोशिश कर रही है।

ताजा घटनाक्रम

31 दिसंबर, 2025 को, अलीमा खान और उनकी बहनें रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर इमरान खान से मिलने पहुंचीं। मुलाकात की अनुमति न मिलने पर उन्होंने जेल के बाहर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने और सरकार विरोधी नारे लगने पर पुलिस ने कार्रवाई की, धरना दे रहे पीटीआई कार्यकर्ताओं को तितर-बितर किया और अलीमा खान व उनकी बहनों को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। यह इमरान खान के परिवार के सदस्यों के लिए पहली बार नहीं है कि उन्हें समर्थन में प्रदर्शन करने या मिलने की कोशिश करने पर हिरासत में लिया गया हो, जो पाकिस्तान की बिगड़ती राजनीतिक स्थिति और सरकार के कड़े रुख को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि: क्यों हो रही हैं गिरफ्तारियां?

अलीमा खान की गिरफ्तारी पाकिस्तान में चल रहे व्यापक राजनीतिक दमन का हिस्सा है। इमरान खान को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही देश में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। इमरान खान को कई मामलों में दोषी ठहराया गया है और वे अदियाला जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद, पीटीआई कार्यकर्ताओं ने देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन किए, जिनमें सरकारी इमारतों, सैन्य प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। सरकार ने इन प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला किया है, जिसमें गिरफ्तारियां और कानूनी मुकदमे शामिल हैं। अलीमा खान पर भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने, भड़काने और सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ कई गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और उनकी संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश दिया गया है। ये सभी कार्रवाई नवंबर 2024 और उसके बाद हुए डी-चौक विरोध प्रदर्शनों और अन्य रैलियों से संबंधित हैं।

अलीमा खान पर लगे मुख्य आरोप

अलीमा खान पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने और उन्हें भड़काने के गंभीर आरोप हैं। नवंबर 2024 में इस्लामाबाद के डी-चौक पर हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ कई बार गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। रावलपिंडी की आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने उन्हें अदालत में लगातार पेश न होने के कारण ये वारंट जारी किए हैं। उन पर दंगे, तोड़फोड़, पथराव और सरकार विरोधी नारे लगाने जैसे आरोप हैं। अदालत ने उनके बैंक खातों और संपत्तियों का विवरण भी मांगा है, जिसमें लगभग 124 मिलियन पाकिस्तानी रुपये जमा होने की बात सामने आई है। 18 नवंबर, 2025 को, एटीसी ने 26 नवंबर के विरोध प्रदर्शन से संबंधित एक मामले में लगातार 11वीं बार अनुपस्थित रहने के बाद अलीमा खान के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया और उनके 7 ए.बी.एल. और 15 यू.बी.एल. बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश दिया। ये आरोप पीटीआई द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हैं, जिन्हें सरकार गैरकानूनी मानती है।

सियासी असर और भविष्य की राह

अलीमा खान की लगातार गिरफ्तारियां और उनके खिलाफ कानूनी मामले पाकिस्तान की राजनीति में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल मचा रहे हैं। इन कार्रवाइयों से पीटीआई समर्थकों में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में और अधिक विरोध प्रदर्शनों की आशंका है। सरकार का दमनकारी रुख देश में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई पर चिंता व्यक्त कर रहा है। भविष्य में, पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिति और जटिल होने की संभावना है, क्योंकि इमरान खान और उनके समर्थकों का मानना है कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सरकार को इन विरोध प्रदर्शनों और कानूनी चुनौतियों से निपटने के लिए एक स्थायी समाधान खोजना होगा, अन्यथा देश में अशांति बढ़ सकती है।

जनता की प्रतिक्रिया और कानूनी पेच

अलीमा खान की गिरफ्तारी पर पाकिस्तान की जनता से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। पीटीआई समर्थक और इमरान खान के चाहने वाले इन गिरफ्तारियों को राजनीतिक उत्पीड़न और दमन बता रहे हैं और सोशल मीडिया व सड़कों पर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग सरकार की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी मानते हैं, खासकर इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर। इन गिरफ्तारियों के साथ कई कानूनी पेच जुड़े हुए हैं। अलीमा खान के खिलाफ कई मामलों में गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं और उन्हें विभिन्न अदालतों में पेश होना है। हालांकि उन्हें कुछ मामलों में अंतरिम जमानत मिली है, लेकिन उनके खिलाफ नए आरोप और वारंट लगातार जारी हो रहे हैं। यह दर्शाता है कि पाकिस्तान का कानूनी तंत्र मौजूदा राजनीतिक संकट में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और इन कानूनी लड़ाइयों का परिणाम देश के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा।

पाकिस्तान में यह सियासी बवाल कब थमेगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इमरान खान और उनके परिवार के खिलाफ हो रही कार्रवाइयां देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रही हैं। सरकार और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा का मोड़ देखना दिलचस्प होगा।

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