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  • 2026 में भारत-पाकिस्तान युद्ध का खतरा: अमेरिकी थिंक टैंक की बड़ी चेतावनी, जानें क्या हैं संकेत

    2026 में भारत-पाकिस्तान युद्ध का खतरा: अमेरिकी थिंक टैंक की बड़ी चेतावनी, जानें क्या हैं संकेत

    एक अमेरिकी थिंक टैंक ने 2026 तक भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित सैन्य संघर्ष की ‘मध्यम’ संभावना जताई।

    एक प्रमुख अमेरिकी थिंक टैंक, काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR), ने 2026 तक भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष की “मध्यम” संभावना की चेतावनी दी है। यह चेतावनी चल रहे सीमा तनावों और आतंकवादी गतिविधियों पर चिंताओं के बीच आई है। यह आकलन CFR की ‘2026 में देखने योग्य संघर्ष’ रिपोर्ट का हिस्सा है।

    बढ़े हुए संघर्ष जोखिम के कारण

    • सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि: रिपोर्ट में आतंकवादी समूहों द्वारा बढ़ती गतिविधि को तनाव का प्राथमिक कारण बताया गया है, जिससे एक बड़े टकराव का जोखिम बढ़ रहा है। जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी समूहों द्वारा घुसपैठ और हमले भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय हैं।
    • मई 2025 में संक्षिप्त सैन्य टकराव: रिपोर्ट में मई 2025 में पहलगाम में एक आतंकवादी हमले के बाद एक संक्षिप्त सैन्य झड़प का उल्लेख है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल आदान-प्रदान हुआ। भारत ने जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। ऐसे छोटे टकराव बड़े संघर्षों से पहले हो सकते हैं।

    अमेरिकी हितों पर प्रभाव

    भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी संभावित संघर्ष का अमेरिकी हितों पर “मध्यम प्रभाव” पड़ने का अनुमान है। अमेरिका क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है, और एक बड़ा संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता को महत्वपूर्ण रूप से बदल देगा, जिससे अमेरिकी विदेश नीति और रणनीतिक हित प्रभावित होंगे। यह क्षेत्र अमेरिका, चीन और रूस जैसी बड़ी शक्तियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, और अस्थिरता वैश्विक व्यापार और निवेश को प्रभावित कर सकती है।

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव

    CFR रिपोर्ट में सीमा पार आतंकवादी हमलों में वृद्धि के कारण 2026 तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष की “मध्यम संभावना” भी इंगित की गई है। इस संघर्ष का अमेरिकी हितों पर “कम प्रभाव” होने का अनुमान है, लेकिन यह पूरे क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाता है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान और अन्य आतंकवादी समूहों की गतिविधियां पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करती हैं और भारत-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।

    रक्षा तैयारियों में तेजी

    • भारत की रक्षा तैयारियां: भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में लगभग ₹79,000 करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी दी, जिसमें उन्नत ड्रोन, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और गाइडेड बम शामिल हैं। यह हवाई शक्ति और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत देता है, जिससे भारत की मारक क्षमता और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
    • पाकिस्तान की रक्षा तैयारियां: पाकिस्तान अपनी हवाई रक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए तुर्की और चीन से नए ड्रोन और हवाई रक्षा प्रणालियों को प्राप्त करने पर विचार कर रहा है। चीन और तुर्की पाकिस्तान के लिए पारंपरिक रक्षा भागीदार हैं।

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान तनाव

    दशकों पुराने मुद्दे जैसे कश्मीर विवाद और सीमा पार आतंकवाद लगातार चुनौतियां रहे हैं। पिछले युद्धों में 1947, 1965, 1971 और 1999 का कारगिल युद्ध शामिल हैं। पुलवामा हमला और उसके बाद के बालाकोट हवाई हमले जैसी हाल की घटनाओं ने तनाव बढ़ा दिया। CFR रिपोर्ट इस ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान तनावों पर आधारित है।

    अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका

    संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ ने लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से मुद्दों को हल करने का आग्रह किया है। CFR की चेतावनी के बाद, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से स्थिति पर नजर रखने और शांतिपूर्ण समाधानों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है। हालांकि, बाहरी हस्तक्षेप की सीमाएं हैं, और अंतिम निर्णय दोनों राष्ट्रों के नेतृत्व पर निर्भर करते हैं।

    क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव

    भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी बड़े संघर्ष का पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में अशांति फैल सकती है। व्यापार मार्ग बाधित हो सकते हैं, आर्थिक विकास धीमा हो सकता है, और लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हो सकता है। यदि संघर्ष में परमाणु हथियार शामिल होते हैं तो परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

    शांति और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता

    CFR की चेतावनी को भारत और पाकिस्तान के लिए अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने के लिए एक आह्वान के रूप में देखा जाता है। सैन्य टकराव एक स्थायी समाधान नहीं है। लेख इस बात पर जोर देता है कि युद्ध केवल विनाश और पीड़ा लाता है। नेताओं से बातचीत करने, विश्वास-निर्माण उपायों को लागू करने और तनाव पैदा करने वाले मुद्दों को हल करने का आग्रह किया जाता है। खेल, संस्कृति और व्यापार के माध्यम से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से भी संबंधों में सुधार हो सकता है। शांति और कूटनीति को क्षेत्र की समृद्धि और स्थिरता का एकमात्र मार्ग बताया गया है।

    आगे का रास्ता

    अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट दोनों देशों के लिए अपनी नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने और भविष्य के लिए एक अधिक शांतिपूर्ण रणनीति विकसित करने के लिए एक “वेक-अप कॉल” के रूप में कार्य करती है। दोनों राष्ट्रों के पास सैन्य प्रतिद्वंद्विता में उलझने के बजाय विकास और अपने लोगों को ऊपर उठाने में अपनी ऊर्जा और संसाधनों का निवेश करने का अवसर है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। 2026 तक की अवधि को तनाव कम करने और स्थायी शांति की दिशा में कदम उठाने का अवसर बताया गया है।

  • “अतिक्रमण हटाने में Jet2 Holiday से भी ज़्यादा सुकून”: CM हिमंत के बुलडोजर वाले बयान ने मचाया तहलका

    “अतिक्रमण हटाने में Jet2 Holiday से भी ज़्यादा सुकून”: CM हिमंत के बुलडोजर वाले बयान ने मचाया तहलका

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक अनोखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमणकारियों से जमीन खाली करवाना उन्हें जेट2 हॉलिडे से भी ज़्यादा सुकून देता है। यह बयान राज्य में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियानों के प्रति उनके दृढ़ रुख को दर्शाता है।

    मुख्यमंत्री हिमंत का बेजोड़ बयान

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में अपने एक बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जमीन खाली करवाना उन्हें किसी जेट2 हॉलिडे से भी ज्यादा सुकून देता है। उनका यह बयान राज्य में अतिक्रमण विरोधी अभियानों के प्रति सरकार के कड़े रुख को एक बार फिर रेखांकित करता है।

    बुलडोजर कार्रवाई और ‘सुकून’ की तुलना

    गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा, “अतिक्रमणकारियों से दो एकड़ जमीन खाली करवाने में जो सुकून मिलता है, वह जेट2 हॉलिडे से भी अधिक है।” यह तुलना उनके मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और अवैध अतिक्रमणों से निपटने की प्राथमिकता को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार जनहित में इस तरह की कार्रवाई जारी रखेगी, भले ही इसका विरोध क्यों न हो। उनका यह बयान असम में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियानों की सफलता और उनसे मिलने वाले परिणामों पर उनके संतोष को प्रकट करता है।

    असम में अतिक्रमण विरोधी अभियान

    असम सरकार ने पिछले कुछ समय से राज्यभर में अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। वन भूमि, सरकारी संपत्तियों, ऐतिहासिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर हुए अतिक्रमणों को हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन अभियानों का उद्देश्य राज्य की भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करना है, जिन पर अक्सर अवैध बस्तियों या गतिविधियों का आरोप लगता रहा है। सरकार का मानना है कि ये अतिक्रमण राज्य के विकास और पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

    राज्य सरकार का दृढ़ संकल्प

    मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम सरकार ने अवैध गतिविधियों और अतिक्रमणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अपने इस रुख पर कायम है और विकास व सुशासन के लिए कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकेगी। यह टिप्पणी उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश भी है जो सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहने का संकेत देती है।

  • इमरान खान की बहन अलीमा खान गिरफ्तार: पाकिस्तान में सियासी हलचल तेज

    इमरान खान की बहन अलीमा खान गिरफ्तार: पाकिस्तान में सियासी हलचल तेज

    पाकिस्तान में सियासी संकट गहरा रहा है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ रही हैं और उनके परिवार पर भी कानूनी कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है। इमरान खान की बहन अलीमा खान को एक बार फिर पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह घटना तब हुई जब अलीमा खान अपनी बहनों के साथ रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद इमरान खान से मिलने का प्रयास कर रही थीं। पुलिस ने उन्हें और अन्य प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया और कुछ समय के लिए हिरासत में लिया। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान गहरे राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है, और इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को सरकार सख्ती से दबाने की कोशिश कर रही है।

    ताजा घटनाक्रम

    31 दिसंबर, 2025 को, अलीमा खान और उनकी बहनें रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर इमरान खान से मिलने पहुंचीं। मुलाकात की अनुमति न मिलने पर उन्होंने जेल के बाहर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने और सरकार विरोधी नारे लगने पर पुलिस ने कार्रवाई की, धरना दे रहे पीटीआई कार्यकर्ताओं को तितर-बितर किया और अलीमा खान व उनकी बहनों को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। यह इमरान खान के परिवार के सदस्यों के लिए पहली बार नहीं है कि उन्हें समर्थन में प्रदर्शन करने या मिलने की कोशिश करने पर हिरासत में लिया गया हो, जो पाकिस्तान की बिगड़ती राजनीतिक स्थिति और सरकार के कड़े रुख को दर्शाता है।

    पृष्ठभूमि: क्यों हो रही हैं गिरफ्तारियां?

    अलीमा खान की गिरफ्तारी पाकिस्तान में चल रहे व्यापक राजनीतिक दमन का हिस्सा है। इमरान खान को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही देश में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। इमरान खान को कई मामलों में दोषी ठहराया गया है और वे अदियाला जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद, पीटीआई कार्यकर्ताओं ने देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन किए, जिनमें सरकारी इमारतों, सैन्य प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। सरकार ने इन प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला किया है, जिसमें गिरफ्तारियां और कानूनी मुकदमे शामिल हैं। अलीमा खान पर भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने, भड़काने और सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ कई गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और उनकी संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश दिया गया है। ये सभी कार्रवाई नवंबर 2024 और उसके बाद हुए डी-चौक विरोध प्रदर्शनों और अन्य रैलियों से संबंधित हैं।

    अलीमा खान पर लगे मुख्य आरोप

    अलीमा खान पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने और उन्हें भड़काने के गंभीर आरोप हैं। नवंबर 2024 में इस्लामाबाद के डी-चौक पर हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ कई बार गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। रावलपिंडी की आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने उन्हें अदालत में लगातार पेश न होने के कारण ये वारंट जारी किए हैं। उन पर दंगे, तोड़फोड़, पथराव और सरकार विरोधी नारे लगाने जैसे आरोप हैं। अदालत ने उनके बैंक खातों और संपत्तियों का विवरण भी मांगा है, जिसमें लगभग 124 मिलियन पाकिस्तानी रुपये जमा होने की बात सामने आई है। 18 नवंबर, 2025 को, एटीसी ने 26 नवंबर के विरोध प्रदर्शन से संबंधित एक मामले में लगातार 11वीं बार अनुपस्थित रहने के बाद अलीमा खान के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया और उनके 7 ए.बी.एल. और 15 यू.बी.एल. बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश दिया। ये आरोप पीटीआई द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हैं, जिन्हें सरकार गैरकानूनी मानती है।

    सियासी असर और भविष्य की राह

    अलीमा खान की लगातार गिरफ्तारियां और उनके खिलाफ कानूनी मामले पाकिस्तान की राजनीति में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल मचा रहे हैं। इन कार्रवाइयों से पीटीआई समर्थकों में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में और अधिक विरोध प्रदर्शनों की आशंका है। सरकार का दमनकारी रुख देश में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई पर चिंता व्यक्त कर रहा है। भविष्य में, पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिति और जटिल होने की संभावना है, क्योंकि इमरान खान और उनके समर्थकों का मानना है कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सरकार को इन विरोध प्रदर्शनों और कानूनी चुनौतियों से निपटने के लिए एक स्थायी समाधान खोजना होगा, अन्यथा देश में अशांति बढ़ सकती है।

    जनता की प्रतिक्रिया और कानूनी पेच

    अलीमा खान की गिरफ्तारी पर पाकिस्तान की जनता से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। पीटीआई समर्थक और इमरान खान के चाहने वाले इन गिरफ्तारियों को राजनीतिक उत्पीड़न और दमन बता रहे हैं और सोशल मीडिया व सड़कों पर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग सरकार की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी मानते हैं, खासकर इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर। इन गिरफ्तारियों के साथ कई कानूनी पेच जुड़े हुए हैं। अलीमा खान के खिलाफ कई मामलों में गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं और उन्हें विभिन्न अदालतों में पेश होना है। हालांकि उन्हें कुछ मामलों में अंतरिम जमानत मिली है, लेकिन उनके खिलाफ नए आरोप और वारंट लगातार जारी हो रहे हैं। यह दर्शाता है कि पाकिस्तान का कानूनी तंत्र मौजूदा राजनीतिक संकट में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और इन कानूनी लड़ाइयों का परिणाम देश के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा।

    पाकिस्तान में यह सियासी बवाल कब थमेगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इमरान खान और उनके परिवार के खिलाफ हो रही कार्रवाइयां देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रही हैं। सरकार और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा का मोड़ देखना दिलचस्प होगा।

  • प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की गजब लव स्टोरी: अवीवा बेग संग हुई सगाई

    प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की गजब लव स्टोरी: अवीवा बेग संग हुई सगाई

    प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की राह चले बेटे रेहान, मां की तरह 18 की उम्र में ही अविवा बेग संग परवान चढ़ा इश्क, गजब है लव स्टोरी

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा ने अपनी लंबे समय की गर्लफ्रेंड अविवा बेग से सगाई कर ली है। यह खबर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।

    रेहान और अविवा की प्रेम कहानी बचपन की दोस्ती से शुरू हुई और अब शादी तक पहुँच गई है। वे लगभग सात साल से एक-दूसरे के साथ हैं।

    एक साझा जुनून ने करीब लाया

    रेहान वाड्रा और अविवा बेग बचपन में मिले थे। दिल्ली में पली-बढ़ी अविवा बेग एक जानी-मानी फोटोग्राफर और प्रोड्यूसर हैं। रेहान वाड्रा भी एक विजुअल आर्टिस्ट और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हैं। फोटोग्राफी के प्रति उनके साझा जुनून ने उन्हें और करीब ला दिया।

    रिश्ते का बढ़ना

    उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई, और उन्होंने अपने रिश्ते को बहुत निजी रखा। सूत्रों के अनुसार, रेहान ने अविवा को निजी तौर पर प्रपोज किया, और उन्होंने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया।

    परिवार की सहमति और भविष्य की योजनाएँ

    दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को खुशी-खुशी मंजूरी दे दी है। प्रियंका गांधी और अविवा की माँ, नंदिता बेग भी पुरानी दोस्त हैं, जिससे यह बंधन और मजबूत होता है। सगाई समारोह जनवरी 2026 की शुरुआत में राजस्थान में एक निजी कार्यक्रम में होने वाला है।

    रेहान वाड्रा का परिचय

    • 29 अगस्त, 2000 को जन्मे रेहान की उम्र अभी 25 साल है।
    • उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के श्री राम स्कूल और बाद में देहरादून के प्रतिष्ठित दून स्कूल से प्राप्त की, जहाँ उनके नाना, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और मामा राहुल गांधी ने भी पढ़ाई की थी।
    • उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) से राजनीति का अध्ययन किया।
    • रेहान हमेशा कला और फोटोग्राफी के प्रति झुकाव रखते रहे हैं।
    • वह सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं और एक पेशेवर इंस्टॉलेशन और विजुअल आर्टिस्ट हैं।
    • उनकी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी, स्ट्रीट फोटोग्राफी और कमर्शियल फोटोग्राफी में गहरी रुचि है।
    • उन्होंने 10 साल की उम्र में फोटोग्राफी शुरू की थी।
    • 2021 में, उनकी पहली फोटोग्राफी प्रदर्शनी ‘डार्क परसेप्शन’ दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित की गई थी, जिसमें प्रकाश, स्थान और समय के विषय थे।
    • उनका कलात्मक झुकाव अविवा के साथ उनके रिश्ते का आधार है, जो इसी क्षेत्र में भी शामिल हैं।

    प्रियंका और रॉबर्ट की प्रेम कहानी की गूँज

    • रेहान की सगाई ने कई लोगों को प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की अपनी प्रेम कहानी की याद दिला दी है।
    • प्रियंका रॉबर्ट से दिल्ली में एक कॉमन फ्रेंड के घर पर मिली थीं जब वह 13 साल की थीं। रॉबर्ट प्रियंका की सादगी से प्रभावित हुए थे।
    • समय के साथ उनकी बातचीत और मुलाकातें बढ़ती गईं। प्रियंका ने एक साक्षात्कार में बताया कि उन्हें रॉबर्ट का यह पहलू पसंद आया कि उन्होंने कभी उनके साथ अलग व्यवहार नहीं किया। वह रॉबर्ट को बहुत ईमानदार व्यक्ति मानती हैं और उन्होंने सराहा कि उन्होंने हाई-प्रोफाइल राजनीतिक परिवार के माहौल को कैसे संभाला।
    • मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश में जन्मे रॉबर्ट वाड्रा की माँ स्कॉटलैंड से हैं और वे एक व्यावसायिक परिवार से संबंध रखते हैं।
    • एक पारंपरिक प्रस्ताव के बजाय, रॉबर्ट और प्रियंका ने मिलकर अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
    • शुरुआत में, रॉबर्ट के पिता शादी के पक्ष में नहीं थे, लेकिन रॉबर्ट ने अंततः उन्हें मना लिया।
    • प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा ने 18 फरवरी, 1997 को शादी की। उनके दो बच्चे हैं: रेहान और मिराया।
    • रॉबर्ट और प्रियंका अक्सर सोशल मीडिया पर स्नेही पोस्ट साझा करते हैं, जो उनके मजबूत रिश्ते और आपसी सम्मान को दर्शाता है।

    गांधी परिवार की नई पीढ़ी के लिए एक नया अध्याय

    रेहान वाड्रा और अविवा बेग की सगाई गांधी परिवार की युवा पीढ़ी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह दर्शाता है कि परिवार के युवा अपने चुने हुए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं और अपने व्यक्तिगत जीवन में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

    रेहान और अविवा दोनों कला में शामिल हैं और अपने काम के प्रति जुनूनी हैं। उनकी यात्रा कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है जो अपने जुनून को आगे बढ़ाना चाहते हैं, भले ही वे प्रमुख राजनीतिक परिवारों से आते हों।

    लेख उनके नए सफर और भविष्य की शादी के लिए प्रत्याशा व्यक्त करते हुए समाप्त होता है, जिसमें दोनों परिवारों और शुभचिंतकों की ओर से शुभकामनाएँ दी जाती हैं।

  • साल 2025 खत्म होते-होते भारत ने रचा इतिहास: बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जापान को पछाड़ा

    साल 2025 खत्म होते-होते भारत ने रचा इतिहास: बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जापान को पछाड़ा

    देश के लिए एक और बड़ी खुशखबरी! साल 2025 के जाते-जाते भारत ने आर्थिक मोर्चे पर एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। अब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जिसने अपने आर्थिक प्रतिद्वंद्वी जापान को पीछे छोड़ दिया है। यह खबर पूरे देश के लिए गर्व का विषय है और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का साफ संकेत है। देशवासी इस उपलब्धि को नए साल के जश्न से पहले एक बड़े उपहार के तौर पर देख रहे हैं।

    भारत बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: जापान को पछाड़, आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा देश

    एक ऐतिहासिक उपलब्धि

     साल 2025 भारत के लिए आर्थिक मोर्चे पर एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व गति से विकास करते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने न केवल जापान को पीछे छोड़ा है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और क्षमता का भी प्रदर्शन किया है। यह खबर हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है और देश के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करती है। यह सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के अथक परिश्रम, सरकार की दूरदर्शी नीतियों और देश की मजबूत आंतरिक शक्ति का प्रमाण है।

    अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और भारत सरकार की नवीनतम आर्थिक समीक्षा रिपोर्टों के अनुसार, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है, जिसने जापान के सकल घरेलू उत्पाद को पीछे छोड़ दिया है। यह एक ऐसा क्षण है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। भारत, जो कभी एक विकासशील राष्ट्र के रूप में देखा जाता था, अब एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस सफलता के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता निवेश, और संरचनात्मक सुधार शामिल हैं।

    भारत की आर्थिक यात्रा:

    विकास की राह पर अग्रसर भारत की आर्थिक यात्रा पिछले कुछ दशकों में उल्लेखनीय रही है। उदारीकरण की शुरुआत से लेकर आज तक, देश ने आर्थिक विकास के कई चरणों को सफलतापूर्वक पार किया है। 1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नए द्वार खोले, जिससे विदेशी निवेश बढ़ा और घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिला। सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में भारत ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

    पिछले कुछ वर्षों में, भारत सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया है और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रौद्योगिकी को आम जन तक पहुंचाया है। इन प्रयासों ने न केवल आर्थिक गतिविधियों को तेज किया है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए हैं। विश्व बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे संस्थानों ने भी भारत की विकास दर के अनुमानों को लगातार ऊपर की ओर संशोधित किया है, जो देश की मजबूत आर्थिक नींव को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, RBI ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है, जो असाधारण रूप से मजबूत वृद्धि का संकेत है।

    भारत की यह तीव्र आर्थिक वृद्धि दर उसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाती है। यह गति ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति और व्यापारिक बाधाएं शामिल हैं। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, भारत ने अपनी आंतरिक शक्ति और लचीलेपन का प्रदर्शन किया है।

    विकास के प्रमुख स्तंभ: किन कारकों ने दी गति?

    भारत की इस ऐतिहासिक आर्थिक छलांग के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक हैं। इन्हें समझना यह जानने के लिए महत्वपूर्ण है कि देश ने इतनी तेजी से यह मुकाम कैसे हासिल किया।

    • मजबूत घरेलू मांग और उपभोग: भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, और यहां की मजबूत घरेलू मांग अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बढ़ती आय, शहरीकरण और बदलते उपभोक्ता व्यवहार ने वस्तुओं और सेवाओं की मांग में लगातार वृद्धि की है। विशेष रूप से, निजी उपभोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख चालक है।
    • बढ़ता निवेश और बुनियादी ढांचा विकास: सरकार ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और डिजिटल कनेक्टिविटी पर भारी निवेश किया है। इन निवेशों ने न केवल रोजगार सृजित किए हैं बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है, जिससे व्यवसायों के लिए एक अनुकूल माहौल बना है। निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ रहा है, जो भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
    • संरचनात्मक सुधार और नीतिगत स्थिरता: पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने कई साहसिक संरचनात्मक सुधार किए हैं। वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधार, दिवालियापन संहिता (IBC), और श्रम कानूनों में सुधार ने व्यापार करने में आसानी को बढ़ाया है और निवेश को आकर्षित किया है। इन सुधारों ने अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया है।
    • डिजिटल क्रांति और वित्तीय समावेशन: ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान ने देश में एक डिजिटल क्रांति ला दी है। UPI जैसे डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने लेनदेन को आसान और तेज बनाया है। जन धन योजना जैसी पहलों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं।
    • निर्यात प्रदर्शन में सुधार: वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत ने अपने निर्यात प्रदर्शन में सुधार किया है। विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ी है, और सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ और निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं इसमें सहायक रही हैं।
    • नियंत्रित मुद्रास्फीति और अनुकूल मौद्रिक नीति: भारतीय रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक स्थिर मौद्रिक नीति ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है और दीर्घकालिक विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया है।

    जापान को पीछे छोड़ने के मायने

    भारत द्वारा जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक प्रतीकात्मक और वास्तविक दोनों तरह की उपलब्धि है। जापान, जो दशकों से एक आर्थिक दिग्गज रहा है, अब धीमी गति से बढ़ रहा है और कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

    • जनसांख्यिकीय चुनौतियां: जापान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उसकी तेजी से बूढ़ी होती आबादी और घटती जन्म दर है। इससे कार्यबल में कमी आई है और सामाजिक सुरक्षा लागतों पर दबाव बढ़ा है, जिससे आर्थिक विकास की गति धीमी हुई है।
    • धीमी आर्थिक वृद्धि: जापान की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ रही है। 2025 और 2026 के लिए इसकी आर्थिक वृद्धि दर लगभग 0.6% रहने का अनुमान है, जो भारत की 6% से अधिक की वृद्धि दर से काफी कम है। वैश्विक व्यापार में मंदी का भी जापान के निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
    • मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति: जापान दशकों तक अपस्फीति (deflation) से जूझता रहा है, और अब वह मुद्रास्फीति की एक मध्यम अवधि की ओर बढ़ रहा है। बैंक ऑफ जापान अपनी दशकों पुरानी अति-शिथिल मौद्रिक नीति को सामान्य करने की प्रक्रिया में है, जिसने ब्याज दरों में वृद्धि की है। इन परिवर्तनों का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
    • प्रति व्यक्ति आय का अंतर: हालांकि भारत ने कुल जीडीपी में जापान को पीछे छोड़ दिया है, प्रति व्यक्ति आय में अभी भी एक बड़ा अंतर है। 2025 में, भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग $2,934 अनुमानित है, जबकि जापान की $33,955 है। यह दर्शाता है कि भारत को अपनी जनसंख्या के बड़े हिस्से की जीवनशैली में सुधार के लिए अभी भी लंबा रास्ता तय करना है।

    भारत की युवा और बढ़ती आबादी, मजबूत घरेलू बाजार और नवाचार की तीव्र गति उसे दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत स्थिति में रखती है, जबकि जापान को अपनी संरचनात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

    भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां: अगला लक्ष्य – तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

    भारत की यह उपलब्धि केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। देश का अगला बड़ा लक्ष्य अगले ढाई से तीन वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है। अनुमान है कि 2030 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो इसे एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य मजबूत नीतिगत ढांचे, निरंतर निवेश और नवाचार पर केंद्रित प्रयासों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

    हालांकि, इस यात्रा में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दे भारत के विकास पथ को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, असमानता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार, और स्थायी रोजगार सृजन जैसी आंतरिक चुनौतियों से निपटना भी महत्वपूर्ण होगा। सरकार और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी, नवाचार को प्रोत्साहन, और मानव पूंजी में निवेश भारत को इन चुनौतियों का सामना करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।

    आम आदमी पर प्रभाव: विकास के लाभ

    यह आर्थिक उछाल केवल बड़े आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम भारतीय के जीवन पर भी पड़ता है।

    • रोजगार के अवसर: मजबूत आर्थिक वृद्धि से नए उद्योगों का विकास होता है और मौजूदा उद्योगों का विस्तार होता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। यह विशेष रूप से युवा आबादी के लिए महत्वपूर्ण है।
    • बेहतर जीवन स्तर: बढ़ती अर्थव्यवस्था का अर्थ है लोगों की आय में वृद्धि। उच्च आय बेहतर जीवन स्तर, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आवास तक पहुंच प्रदान करती है।
    • बुनियादी ढांचे में सुधार: सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे निवेश से आम नागरिक को सीधे लाभ मिलता है। बेहतर सड़कें, सार्वजनिक परिवहन, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी से जीवन आसान होता है और व्यापार को बढ़ावा मिलता है।
    • सामाजिक कल्याण योजनाएं: बढ़ती अर्थव्यवस्था सरकार को सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों जैसे गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य बीमा और शिक्षा सहायता पर अधिक खर्च करने में सक्षम बनाती है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को लाभ होता है।
    • वैश्विक प्रतिष्ठा: एक मजबूत अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को बढ़ाती है। यह विदेशी निवेश को आकर्षित करता है और भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर पैदा करता है।

    संक्षेप में, भारत का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना देश के लिए एक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि दशकों के अथक प्रयासों और दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है। आगे की राह चुनौतियों से भरी हो सकती है, लेकिन जिस गति और दृढ़ संकल्प के साथ भारत आगे बढ़ रहा है, वह निश्चित रूप से इसे एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जाएगा। यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण है और देश की असीमित क्षमता का प्रमाण है।

  • उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का कहर: दिल्ली-NCR से बिहार तक जनजीवन प्रभावित, हाई अलर्ट जारी

    उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का कहर: दिल्ली-NCR से बिहार तक जनजीवन प्रभावित, हाई अलर्ट जारी

    उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर बिहार तक, कई राज्यों में इस मौसम का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया है। भीषण शीतलहर, गिरते तापमान और शून्य दृश्यता के कारण लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए हैं।

    पूरे उत्तर भारत में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे गिर गया है। दिल्ली में पारा 6.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि हरियाणा के हिसार में तो यह सिर्फ 2.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ों पर बर्फबारी हुई, जिसका असर मैदानी इलाकों में गलन भरी ठंड के रूप में दिख रहा है।

    सुबह के समय घना कोहरा इतना गहरा था कि कुछ जगहों पर दृश्यता लगभग खत्म हो गई थी। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रविवार सुबह दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। सड़कों पर लाइटें जलाकर धीरे-धीरे गाड़ियां चलानी पड़ीं।

    कड़ाके की ठंड का असर दिहाड़ी मजदूरों और सड़क किनारे काम करने वाले छोटे दुकानदारों पर भी पड़ा है। सुबह काम पर निकलने वाले लोगों की संख्या कम रही, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है। बाजार भी देर से खुले और जल्दी बंद हो गए, जिसका व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव दिखा।

    यातायात पर गहरा असर

    घने कोहरे के कारण यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। दिल्ली-एनसीआर और आसपास के एक्सप्रेसवे पर सुबह के समय गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

    उड़ानें रद्द, ट्रेनें लेट

    हवाई यातायात पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कोहरे के कारण 128 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और 300 से ज़्यादा उड़ानें देरी से चल रही हैं। इससे हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। रेलवे ने भी 90 से अधिक ट्रेनों के लेट होने की जानकारी दी है, जिससे यात्री घंटों स्टेशन पर फंसे रहे।

    एयरलाइंस की सलाह

    प्रमुख एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया और इंडिगो ने यात्रियों के लिए यात्रा सलाह जारी की है। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी पहले ही ले लें और हवाई अड्डे पर समय से काफी पहले पहुंचें। इससे अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सकेगा। एयरपोर्ट पर अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया है ताकि यात्रियों को हर संभव मदद मिल सके।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई अलर्ट जारी किए हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में ‘गंभीर कोल्ड डे’ की स्थिति के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। इसका मतलब है कि यहां दिन का तापमान भी सामान्य से काफी कम रहेगा और ठंड बहुत ज्यादा होगी, जिससे लोगों को दिनभर घर में रहने की सलाह दी जाती है।

    पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में शीतलहर और घने कोहरे के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ है। यह बताता है कि इन क्षेत्रों में भी ठंड और कोहरे की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वहीं, दिल्ली में घने कोहरे के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है, जहां लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    ठंड से बचाव के उपाय और सरकारी कदम

    ठंड से बचने के लिए लोगों को गर्म कपड़े पहनने, घर में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को खास ख्याल रखने के लिए कहा गया है। डॉक्टरों ने हीटर या ब्लोअर का इस्तेमाल करते समय उचित वेंटिलेशन बनाए रखने की सलाह दी है, ताकि कार्बन मोनोऑक्साइड poisoning का खतरा न हो।

    भीषण ठंड के कारण उत्तर प्रदेश में कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूलों को 1 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है। बच्चों को ठंड से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है। कई शहरों में नगर निगम ने रात में बेघर लोगों के लिए अस्थायी आश्रय और अलाव की व्यवस्था की है। किसानों को भी अपनी फसलों और पशुओं को ठंड से बचाने के लिए विशेष उपाय करने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली-एनसीआर में ठंड के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन गया है, जहां हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी (400 से ऊपर) में बनी हुई है। कोहरे के साथ प्रदूषण के कण मिलकर स्मॉग का रूप ले लेते हैं, जिससे सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने फेफड़ों के मरीजों और बच्चों को घर के अंदर रहने की सलाह दी है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि नए साल तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में घना कोहरा और शीतलहर बनी रहेगी। एक नया पश्चिमी विक्षोभ 30 दिसंबर से 2 जनवरी के बीच पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी ला सकता है। इसके असर से पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़ और पश्चिमी राजस्थान में भी हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

    हालांकि, इस बारिश के बाद हवाओं की दिशा बदलेगी और उत्तर भारत में और भी ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे कड़ाके की शीतलहर का एक और दौर शुरू होने की आशंका है। इसके साथ घना कोहरा भी छाएगा। लोगों को अगले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। ऐसे में सभी को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।

  • रणवीर सिंह और सारा अर्जुन की ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास, 2025 की सबसे बड़ी हिट बनी धुरंधर

    रणवीर सिंह और सारा अर्जुन की ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास, 2025 की सबसे बड़ी हिट बनी धुरंधर

    रणवीर सिंह और सारा अर्जुन की फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। यह फिल्म 5 दिसंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। आदित्य धर ने इस जासूसी एक्शन थ्रिलर का निर्देशन किया है, और यह दर्शकों को खूब पसंद आ रही है।

    फिल्म ने जबरदस्त कमाई करते हुए बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया है। ‘धुरंधर’ साल 2025 की सबसे बड़ी हिट साबित हुई है। यह बॉलीवुड की 1000 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली चौथी फिल्म है। यह अब तक की सातवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म भी बन गई है।

    फिल्म में रणवीर सिंह और सारा अर्जुन के अलावा अक्षय खन्ना, संजय दत्त, आर. माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे दिग्गज कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं। यह एक जासूसी एक्शन थ्रिलर है। यह दर्शकों को कुर्सी से बांधे रखती है। फिल्म की कहानी और कलाकारों का अभिनय तारीफ के काबिल है।

    यह फिल्म दो-भाग वाली श्रृंखला की पहली किस्त है। फिल्म के दूसरे भाग का नाम ‘धुरंधर भाग 2: द रिवेंज’ है। इसकी रिलीज तारीख भी घोषित कर दी गई है। यह सीक्वल 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगा।

    फिल्म की कहानी एक अंडरकवर एजेंट जसकीरत सिंह रंगी उर्फ हमजा अली मजारी के इर्द-गिर्द घूमती है। वह पाकिस्तान के कराची शहर के आपराधिक और राजनीतिक गलियारों में घुसपैठ करता है। उसका मकसद पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को बेनकाब करना और उसे खत्म करना है।

    ‘धुरंधर’ की कहानी 1999 के आईसी-814 विमान अपहरण, 2001 के भारतीय संसद हमले और 2008 के मुंबई हमलों जैसी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताई जाती है। फिल्म में ऑपरेशन लियारी के इर्द-गिर्द की घटनाओं को भी शामिल किया गया है। यह फिल्म सच्चाई और कल्पना का मिश्रण है।

    हालांकि, फिल्म को इसकी कहानी और कुछ दृश्यों के कारण कई विवादों का सामना करना पड़ा है। आलोचकों ने इसे ‘प्रचार’ बताया है। उन पर तथ्य और कल्पना को मिलावट करने का आरोप भी लगाया गया है। यह फिल्म पाकिस्तान और भारत, दोनों देशों में चर्चा का विषय बनी।

    भारत में, मेजर मोहित शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया कि फिल्म उनकी जिंदगी से प्रेरित है। उन्होंने फिल्म की रिलीज रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने दोबारा जांच की। इसके बाद बोर्ड ने पाया कि फिल्म मेजर मोहित शर्मा से जुड़ी नहीं है।

    पाकिस्तान में भी फिल्म का विरोध हुआ है। चौधरी असलम की विधवा ने अपने पति के किरदार दिखाए जाने पर आपत्ति जताई। बलूच मकरानी समुदाय ने भी कुछ डायलॉग का विरोध किया। उन्होंने कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के राजनेताओं ने भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि फिल्म में उनकी पार्टी को गलत तरीके से दिखाया गया है।

    इन विवादों के कारण फिल्म को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया। दूसरी ओर, पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद, ‘धुरंधर’ को रिकॉर्ड 2 मिलियन से अधिक डिजिटल पायरेटेड डाउनलोड मिले। यह पाकिस्तान में सबसे ज्यादा पायरेटेड फिल्मों में से एक बन गई।

    धुरंधर का बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक प्रदर्शन

    फिल्म ने 28 दिसंबर 2025 तक घरेलू स्तर पर ₹862.69 करोड़ और विदेशों में ₹238.12 करोड़ की कमाई की है। इसका कुल विश्वव्यापी संग्रह ₹1,100.81 करोड़ से अधिक हो गया है। यह साल 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई है।

    इसके साथ ही, ‘धुरंधर’ अब तक की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म है। यह सातवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म भी है। यह पहली ‘ए’ सर्टिफाइड भारतीय फिल्म है जो 1000 करोड़ क्लब में शामिल हुई है।

    आदित्य धर ने फिल्म लिखी, सह-निर्माण किया और निर्देशन भी किया है। जियो स्टूडियोज और B62 स्टूडियोज ने मिलकर इसे बनाया है। फिल्म की मुख्य शूटिंग जुलाई 2024 से अक्टूबर 2025 तक भारत के कई राज्यों और थाईलैंड में हुई।

    विकास नौलखा ने सिनेमैटोग्राफी का काम संभाला है। शिवकुमार वी. पनिकर ने संपादन किया है। फिल्म का संगीत शाश्वत सचदेव ने तैयार किया है। इस संगीत को काफी सराहा गया है। फिल्म का 214 मिनट का लंबा रनटाइम भी चर्चा में रहा है।

    आलोचकों ने फिल्म को मिली-जुली और सकारात्मक समीक्षाएं दी हैं। रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना के शानदार अभिनय की खूब तारीफ हुई है। आदित्य धर के निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीक्वेंस को भी दर्शकों ने पसंद किया है।

    कुछ आलोचकों ने फिल्म की गति और तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने के लिए इसकी आलोचना की है। इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया गया है। कुछ लोगों ने इसे सरकार का समर्थन करने वाला भी कहा है। हालांकि, कई लोगों ने इसे एक रोमांचक और मनोरंजक जासूसी ड्रामा माना है।

    ‘धुरंधर’ ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता नहीं पाई है। यह एक सांस्कृतिक बहस का विषय भी बन गई है। इसके सीक्वल का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। यह दर्शकों को इस जासूसी गाथा का अगला अध्याय दिखाएगा। फिल्म ने बॉलीवुड के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है।

  • बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया का 80 की उम्र में निधन

    बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया का 80 की उम्र में निधन

    बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और अनुभवी राजनेता खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने 30 दिसंबर, 2025 को ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके राजनीतिक दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने की है, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

    खालिदा जिया पिछले काफी समय से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। इनमें लिवर सिरोसिस, गठिया, मधुमेह, छाती और हृदय संबंधी बीमारियां, साथ ही किडनी से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं। उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी और 29 नवंबर से वह गहन चिकित्सा इकाई (सीसीयू) में भर्ती थीं।

    11 दिसंबर को उनकी हालत और नाजुक होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। निधन से कुछ ही दिन पहले, 29 दिसंबर को, उनके नाम पर 13वें जातीय संसद चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। यह नामांकन बोगुरा-7 और फेनी-1 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए किया गया था।

    जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों से बरी कर दिया था। इस फैसले के बाद उन्हें फरवरी में होने वाले आम चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिल गई थी। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से उन्हें लंदन में भी चिकित्सा उपचार कराना पड़ा था, जिसके बाद वह मई में बांग्लादेश लौटी थीं।

    खालिदा जिया का राजनीतिक सफर: एक लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा

    खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा। वह बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं। 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा।

    उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की कमान संभाली और पार्टी को एकजुट रखने व मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिया ने तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।

    वह 1991 से 1996, 2001 से 2006 तक और फिर 2007 में कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री रहीं। बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में वह पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, जिन्होंने देश को एक नई दिशा देने का प्रयास किया।

    उनके कार्यकाल के दौरान बांग्लादेश ने आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे। उन्होंने खासकर महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर जोर दिया। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा, उन्हें कई बार कड़े विरोध और राजनीतिक उठापटक का सामना करना पड़ा।

    पिछले कुछ सालों से खालिदा जिया भ्रष्टाचार के कई मामलों का सामना कर रही थीं। इन मामलों के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनवरी 2025 में बरी किए जाने से उन्हें राजनीतिक वापसी की उम्मीद मिली थी, लेकिन उनकी बिगड़ती सेहत ने उनके रास्ते में बाधा डाली। उनके निधन से कुछ दिन पहले ही उनके बेटे तारिक रहमान भी लंदन से बांग्लादेश लौटे थे।

    तारिक रहमान लगभग 17 साल के निर्वासन के बाद देश लौटे थे। उनकी वापसी को राजनीतिक गलियारों में बीएनपी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया था।

    खालिदा जिया और शेख हसीना, ये दो नाम बांग्लादेश की राजनीति में दशकों तक एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे। दोनों ने ही देश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। जिया के निधन से बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।

    बीएनपी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी ने उन्हें एक साहसी नेता और लोकतंत्र की प्रतीक बताया है।

    उनकी याद में देश भर में कई कार्यक्रमों और शोक सभाओं का आयोजन किया जाएगा। जिया के परिवार के सदस्यों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ढाका के अस्पताल में उनके अंतिम दर्शन किए। उनके पार्थिव शरीर को ढाका में ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

    खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त, 1945 को दिनाजपुर जिले के ईसगाँव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिनाजपुर में हुई और बाद में उन्होंने सुरेन्द्रनाथ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उनका विवाह 1960 में जियाउर रहमान से हुआ था, जो उस समय एक सैन्य अधिकारी थे।

    राजनीति में आने से पहले खालिदा जिया एक गृहिणी थीं। पति की हत्या के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। यह उनके लिए एक बड़ा मोड़ था, क्योंकि उन्हें एक ऐसे दल का नेतृत्व करना था जो अपने संस्थापक को खो चुका था। उन्होंने इस चुनौती को बखूबी निभाया और पार्टी को फिर से मजबूत किया।

    बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली और सैन्य शासन के खिलाफ संघर्ष में उनकी भूमिका को हमेशा याद किया जाएगा। 1980 के दशक में उन्होंने सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद के खिलाफ एक लंबा और कठिन संघर्ष लड़ा, जिसके परिणामस्वरूप 1990 में लोकतंत्र की वापसी हुई।

    जिया के समर्थक उन्हें ‘लोकतंत्र की माँ’ के नाम से पुकारते थे। हालांकि, उनके आलोचक उन्हें भ्रष्टाचार और राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए जिम्मेदार ठहराते थे।

    इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्होंने बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उनका निधन न केवल बीएनपी के लिए, बल्कि पूरे बांग्लादेश के लिए एक बड़ी क्षति है। अब सवाल यह है कि खालिदा जिया के बिना बीएनपी का भविष्य क्या होगा। उनके बेटे तारिक रहमान पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं और उन पर नेतृत्व की जिम्मेदारी आ सकती है। हालांकि, पार्टी के सामने अपनी पहचान बनाए रखने और आगामी चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करने की चुनौती होगी।

  • पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण, भारतीय सेना में शामिल करने की मिली मंजूरी

    पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण, भारतीय सेना में शामिल करने की मिली मंजूरी

    भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूती देते हुए, पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का पहला उड़ान परीक्षण सोमवार, 29 दिसंबर, 2025 को सफलतापूर्वक पूरा हो गया। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) में किया गया। इस दौरान रॉकेट ने अपने 120 किलोमीटर के पूरे लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा। इस सफलता को ‘टेक्स्टबुक प्रिसिजन’ यानी एकदम सही बताया गया है।

    यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम के लिए एक बड़ा कदम है। परीक्षण के साथ ही, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट को भारतीय सेना में शामिल करने की मंजूरी भी दे दी। यह दिखाता है कि सरकार इस प्रणाली को कितनी जल्दी सेना का हिस्सा बनाना चाहती है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कामयाबी पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह रॉकेट सशस्त्र बलों की क्षमताओं को बहुत बढ़ाएगा और एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा। यह रॉकेट मौजूदा पिनाका लॉन्चर से ही दागा गया था। इससे इसकी बहुमुखी प्रतिभा साबित होती है। इसका मतलब है कि एक ही लॉन्चर से अलग-अलग रेंज के रॉकेट दागे जा सकते हैं।

    भारतीय सेना की मजबूत होती क्षमता

    भारतीय सेना अपनी लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी क्षमता को और मजबूत करने के लिए 120 किलोमीटर रेंज के इन पिनाका रॉकेटों को हासिल करने का प्रस्ताव पहले ही दे चुकी थी। रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) की मंजूरी के बाद, अब इन रॉकेटों को तेजी से सेना के आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल किया जाएगा। ये रेजिमेंट पहले से ही पिनाका प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह कदम सेना को दुश्मनों पर दूर से ही सटीक हमला करने की ताकत देगा, जिससे उसकी ऑपरेशनल तैयारियां मजबूत होंगी।

    पिनाका LRGR-120: सटीकता और मारक क्षमता

    पिनाका LRGR-120, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (MBRLS) का एक उन्नत रूप है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका इंटीग्रेटेड गाइडेड सिस्टम है, जिससे यह बहुत सटीक निशाना लगा सकता है। इसकी सटीकता इतनी ज्यादा है कि इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) 20 मीटर से भी कम है। आसान भाषा में कहें तो यह अपने लक्ष्य के 20 मीटर के दायरे में ही गिरेगा, जिससे दुश्मन को कम से कम गलती की गुंजाइश मिलती है और आसपास के नुकसान की संभावना कम हो जाती है।

    यह रॉकेट पहले से इस्तेमाल हो रहे पिनाका लॉन्चर से ही दागा गया, जिससे इसकी अनुकूलता का पता चलता है। मौजूदा पिनाका सिस्टम 40 किमी और 75 किमी की रेंज वाले रॉकेट दागते हैं। लेकिन LRGR-120 इस क्षमता को 120 किमी तक ले जाता है। आमतौर पर, एक पिनाका लॉन्चर से 12 बिना-गाइडेड रॉकेट या 8 गाइडेड रॉकेट दागे जा सकते हैं। यह प्रणाली सेना को युद्ध के मैदान में अधिक लचीलापन प्रदान करती है।

    भारत के लिए रणनीतिक महत्व और आत्मनिर्भरता

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट भारत की तोपखाने की ताकत के लिए ‘गेम-चेंजर’ है। यह भारतीय सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल क्षमता और दूर से सटीक हमला करने की क्षमता को काफी बढ़ाएगा। यह प्रणाली भारतीय सेना को दुश्मन के इलाकों में गए बिना, सुरक्षित दूरी से हमला करने का विकल्प देती है। इससे लॉन्च यूनिट्स की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

    खासकर ऊंचे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में यह प्रणाली एक बड़ा फायदा देगी। ऐसे इलाकों में सटीक निशाना लगाना बेहद जरूरी होता है। इसका हल्का प्लेटफॉर्म (22-25 टन) भारत के उबड़-खाबड़ सीमावर्ती इलाकों के लिए अधिक मुफीद है।

    यह चीन के भारी सिस्टमों के मुकाबले बेहतर साबित होगा, भले ही उनकी रेंज समान हो। उन्नत पिनाका वैरिएंट्स को सेना में तेजी से शामिल करने से भारत की सटीक हमला करने और दुश्मन को रोकने की क्षमता और भी मजबूत होगी। यह किसी भी क्षेत्रीय चुनौती का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण है।

    डीआरडीओ की महत्वपूर्ण भूमिका और भविष्य की राह

    पिनाका LRGR-120 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) ने डिजाइन किया है। इसमें हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) ने सहयोग दिया है। साथ ही, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) और रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह पूरी तरह से स्वदेशी विकास है।

    आने वाले समय में, इन उन्नत रॉकेटों के सेना में शामिल होने से भारत की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सैन्य संतुलन और मजबूत होगा। यह न केवल हमारी सेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि दुश्मनों को भी किसी दुस्साहस से पहले दो बार सोचने पर मजबूर करेगा। पिनाका LRGR-120 भारत की आत्मनिर्भरता और सैन्य आधुनिकीकरण के संकल्प को दर्शाता है।